आ रयेले हैं चर्चाकार ठनठन गोपाल बुंदेलखण्डी

अरे सर्किट..कबी आयेंगा तुम? अबी आज का चर्चा नईं सुनाने का है क्या बीडू?

अरे भाई चर्चा तो सुनायेंगा ना…पण आज वो ठनठनगोपाल बुंदेलखंडी आ रयेला है…उसी का ईतंजार कर रयेला है भाई अपुन टेशन पे…

अरे तो सर्किट ..ये बता कल वो बिट्टू बावल्यो आयेला था …वो किदर कू गयेला?

अरे भाई उसको तो मैने टेशन पे जयपुर रवाना कर दियेला है..

काहे कू रवाना कर दियेला तूने? कित्ती मस्त राजस्थानी चर्चा सुना रयेला था वो?

भाई उस को काम था अबी वो जल्दी ही वापस आयेंगा..तब तक ठनठन गोपाल बुंदेलखडी आपको चर्चा सुनायेंगा ना…आज अभी शाम तक उसकी गाडी आयेंगी..तब तक मैं सुनाता ना भाई आपको आज की चर्चा..

हां तू ही सुना डाल सर्किट..

लो सुनो भाई…वो गगन शर्मा जी बता रयेले हैं आस्ट्रेलियन दंपति ने बनाया “मन चाहे फल देने वाला पेड़” …जब जौन सा काने का होयेंगा तब वोईच तोड के खा लेने का भाई..उधर संगीता पुरी जी पूछ रयेली हैं एक ही दिन विज्ञान और ज्‍योतिष में दिलचस्‍पी रखने वाले दो लोग कैसे जन्‍म ले सकते हैं ?? ..अबी अभी मैं क्या बतायेगा भाई?

 

और उधर अल्बेला खत्री जी लाफ़्टर के फ़टके दिखा रयेले हैं भाई लीजिये दोस्तों ! जिन्होंने नहीं देखा, वे अब देख लीजिये albela khatri in LAUGHTER KE PHATKE…  और पाबला जी बता रयेले हैं iNext पर, ब्लॉगिंग से बन रहे ई-रिश्ते और ब्लॉगर मीट की बातें…. और भाई उधर महफ़ूज अली शायद खिसक गयेला है भाई.खुदईच जाके देख डालने का भाई आप सबका प्यार और आशीर्वाद.... मेरा आभार...और मिलिए मेरी सन्यासन गर्ल फ्रेंड से....: महफूज़….

ए सर्किट ..ये क्या ज्यादा तेज चल रयेला है क्या?

नही भाई…वो आजकल बाबा समीरानंद आश्रम मे भर्ती होगयेला है…

अरे वहां तो सारे छंटे हुये बाबा लोग इकठ्ठे होगयेले हैं…इस बालक  की भगवान रक्षा करें….इन बाबाओं से…

 

मैं उन् लोगों का भी शुक्रगुज़ार हूँ.... जो मुझे गन्दी टिप्पणियां लिखने के लिए मजबूर करते हैं.... (शोर्ट टेम्पर्ड जो ठहरा..) उनकी अपेक्षित प्रतिक्रिया से मेरी कार्य उर्जा में बढ़ोतरी होती है. और मेरे शुभचिंतक मेरी कथित खराब टिप्पणियों को पढने के बावजूद भी मुझे समझते हुए स्नेह कि बारिश करते हैं.. मेरे साथ प्रॉब्लम सिर्फ यही है कि अगर कोई मुझे बिना मतलब में खराब बोलता है.... तो उसको मेरा खराब वाला रूप ही  देखना पड़ेगा.... मेरा एक उसूल है आप मुझे झापड़ मारोगे तो मैं गोली मारने में विश्वास रखता हूँ.... आप मुझे एक गाली दोगे तो सौ सुनेंगे.... मैं अपने दोस्तों कि बेईज्ज़ती कभी नहीं बर्दाश्त कर सकता ...चाहे वो रियल वर्ल्ड के हों  या फिर वर्चुअल के...

 

 

 

उधर उच्चारण पर "दो मुक्तक" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") सुना रयेले हैं….राजीव तनेजा जी ने चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-27 …और विवेक रस्तोगी पूछ रयेले हैं कविता की दो लाईनें जो मेरे परम मित्र ने मुझे सुझाई …. आईये इस कविता को पूरी करने में मेरी मदद करें…

अरे सर्किट..अपुन को बता..अपुन बता डालेगा ना अबी की अबी..

हां भाई वो लाईन हैं..

मत लो अंगड़ाईयाँ
वरना हम पर भी असर हो जायेगा

अरे सर्किट बिल्कुल सिंपल है रे…बीडू.. बच्चे को सुला डालने का और क्या? अगली लाईन सुनने का….

बेटा जल्दी से सोजा

नही तो गब्बर  आ जायेगा

 

अरे वाह भाई वाह..आप तो कमाल का शायरी कर दिया भाई…आपका बी एक ब्लाग बना डालता हूं भाई..टिप्पणीयों का बाढ आजायेगा भाई….और नही बी आया तो अपुन चाकू दिखा के ढेर लगवा देगा भाई..आप टेंशन नईं लेने का..अब आगे सुनने का…

 

अरविंद मिश्रा जी का  बोल रयेले हैं आज मन कुछ भडासी हुआ….

अरे सरकिट तो चिंता नईं करने का..सब कुछ उगल डालने का ना..भाई के सामने आके…

ये आप ठीक बात बोल रयेले हैं भाई… इसका बाद मे वो राज भाटीया जी दिलीई आरयेले हैं तो दिल्ली वालो कुछ मदद तो करो ना? ऐसा बोल रयेले हैं भाई…और अब अपुन के झा जी बता रयेले हैं मैं ब्लोग पोस्ट ऐसे पढता हूं .....और आप !  

अरे सर्किट…अपुन तो साला अंघूठा छाप है..अपुन कैसे पढेगा रे?

अरे भाई आप टेंशन नईं लेने का..मैं है ना आपके पास… और फ़िर अपुन के वकील साहब एक गाली चर्चा : अपनी ही टिप्पणियों के बहाने सुना रयेले हैं…दीपक मशाल 'बुद्धा स्माइल'@@@@@दीपक मशाल पूछ रयेले हैं…

 

और भाई  दिलीप कवठेकर  दिलीप के दिल से - 13 पर   राज कपूर और शैलेंद्र... दोस्त दोस्त ना रहा...  के बारे मे बता रयेले हैं…

ये गीत मुझे कई कारणों से बहुत ही दिल के करीब लगता है. मेलोडी के बादशाह संगीतकार शंकर जयकिशन के संगीत में निबद्ध इस गीत में मित्र और पत्नी के लिये नायक के भग्न हृदय के कातर विचारों को बहुत ही असरदार तरीके से भाव प्रवीण बोलों में पिरोया है कविश्रेष्ठ शैलेंद्रजी नें और उन संवेदनाओं को ,उस चुभन को भीगे हुए स्वरों में अनुनादित किया है मुकेशजी नें , जिसके कारण यह गीत एक कालजयी गीत बन गया है.
मगर अगर आपने फ़िल्म देखी हो, तो ये भी कहना पडेगा कि राज जी नें वाकई में इस गीत में अपना दिल और उसके इमोशन्स उंडेल कर रख दिये हैं. आप देखिये , ये गाना पिक्चराईज़ करना बहुत ही मुश्किल होना चाहिये था. दर्शक से खुद राज जी गीत के माध्यम से रू ब रू होते हैं, अपने नज़रिये से, अपने दिल के ज़ख्मों को बयान करते हुए.

अल्पना वर्मा जी  गुनगुनाती धूप..  पर मैनें अपनो से ज़्यादा औरों से प्यार किया था  सुनवा रयेली हैं जिसमे गीत, संगीत और स्वर राजा पाहवा जी का है…

 

मैनें अपनो से ज़्यादा औरों से प्यार किया था'
मुझको डूब ही जाना था,लहरों से प्यार किया था,
मैं ने अपनो से ज़्यादा...............
मेरे दिल बरबादी पर रोने की बात नहीं है,
तूने हद्द से ही कुच्छ ज़्यादा गैरों से प्यार किया था..
मैं ने अपनो से ज़्यादा......

 

 

लिफाफेबाजी और उधार की रिकवरी  करने का तरीका बता रयेले हैं अजित वडनेरकर जी…  और गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'  जबलपुर-ब्रिगेड – पर ललित जी के मोहल्ले के भाग्यशाली लोग जो दफ्तर सही समय पर जातें हैं…ऐसा बता रयेले हैं…

 

और ताऊ पहेली - 53 विजेता श्री प्रकाश गोविंद हो गयेले हैं भाई….

paheli-53-winner

अरे तो सर्किट अपुन क्यों नईं जीत रयेले हैं इस पहेली को? जा ..जाके इस जीतने वाले प्रकाश गोविंद जी को ऊठाके लाने का..और अगली बार जवाब लेके छोड देने का…ऐसे तो अपुन जीतने वालाईच नईं है…

अरे भाई आप काहे कू टेंशन ले रयेला है? मैं करता है ना कूछ…प्रकाश जी से तो मैं ऐसेईच फ़ोन पर पूछ लेगा जवाब..अगली बार आपको जितवा डालेगा ना मैं….और ताऊ डाट इन  पर ही  सु. अल्पना वर्मा.  बता रयेली हैं…

बहनों और भाईयो नमस्कार. आईये अब आज के पहेली के स्थान के बारे में कुछ जानते हैं.
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की देवाशरीफ दरगाह
उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है 'बाराबंकी'.यह लखनऊ से २९ किलमीटर पूरब में स्थित है.

अभिषेक ओझा  एक आलसी का चिठ्ठा पर दूसरा भाग: अलविदा शब्द, साहित्य और ब्लॉगरी तुम से भी..(लंठ महाचर्चा)  कर रयेले हैं… विवेक रस्तोगी कल्पतरु पर सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजय” शिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – ३३ [द्वन्द्वयुद्ध के दाँव….]  पढवा रयेले हैं… और तीसरा खंबा पर दिनेशराय द्विवेदी जी बता रयेले हैं  1926 की न्याय व्यवस्था से हुए परिवर्तन : भारत में विधि का इतिहास-23….. राजीव तनेजा चर्चा पान की दुकान पर  बता रयेले हैं  बोया पेड़ बबूल का

और भाई ये देखो क्या हो गयेला है? अदा' जी  काव्य मंजूषा पर  बोल रयेली हैं   उसी गली में एक अदद दिल पागल छोड़ आये हैं

 

मत पूछ तेरी महफ़िल में हम क्या क्या छोड़ आये हैं
कुछ लम्हें तो आज के थे कुछ बीता कल छोड़ आये हैं
तेरी चौखट पर आँखों ने सजदे में झुकना सीख लिया
आज वहीँ चंद सांसें और इक आँचल छोड़ आये हैं

 

 

और भाई उदर अपने आदित्य का कलेजा मुंह को आ गयेला है….वो बोल रयेला है..इसी को कहते है.."कलेजा मुंह को आना"

अरे सर्किट क्या हुआ? अपुन को बता…एइसेईच कैसे हो गयेला इतना बडा कांड..मैं तेरे को बोल रयेला है..एक एक को फ़ोड डालेगा..अपुन का आदित्य भाई को किसी ने कुछ कर दियेला होयेंगा तो..

अरे भाई आप काहे कू टेंशन ले रयेले हैं…वो तो एईसेईच बूम मार रयेला है..लो खुदईच से पढ के देखने का…

 

शरारत ऑफ द डे

शाम को बाबा अपना खाना लेकर आये.. प्लेट में गरम गरम चावल थे.. मैंने आव देखा न ताव खाना खान करके अपना बायाँ हाथ गरम गरम चावल में दे मारा.. और मेरी रुलाई शुरू.. बाबा एकदम हक्के बक्के.. तुरंत मेरा हाथ नल के नीचे लगाया... फिर हाथ ठन्डे पानी से भरे मग में दाल दिया.. मेरा रोना अब भी बंद नहीं हुआ.. लेकिन बाबा को अब तक समझ आ गया की मेरा हाथ जला नहीं है.. फिर एक गीले नेपकिन में हाथ लपेट कर हम गैलेरी में मेट्रो और भो भो देखने गए... पांच मिनिट बाद वापस आये तो मेरी मुस्कान भी वापस आ गई थी... इसी को कहते है.. "कलेजा मुंह को आना'

और नीरज जाट जी मुसाफिर हूँ यारों अब चले जा रयेले हैं हैं वैष्णों देवी माता के …उनकओ बुलावा आयेला है भाई चलो बुलावा आया है….और भाई अब आपकी उड़न तश्तरी ....आ गयेली है…हाय री ये दुनिया? कहते हुये…

अरे सर्किट इसका क्या मतलब? ये हाय हाय काहे कू कर रयेले हैं समीर भाई?

अरे भाई..वो उनका लेपटोप खराब होगयेला है..बहुत वायरस आगयेले हैं..

अरे तो उनको बोलने का…लेपटोप को सर्दी मे आराम से च्यवनप्राश खिलाने का..भौत मजबुत रहेंगा…

हां मैं बोलता ना भाई..अबी की अबी..आप टेंशन नईं लेने का…

 

यह क्या? पूछ रहा है कि कितने बजे फ्लाईट है अपने दोस्त से हिन्दी में!! जाने कौन है हिन्दुस्तानी या पाकिस्तानी.
यही दृष्य आये दिन वेन्कूवर और टोरंटो में भी देखता हूँ हवाई अड्डे पर.
आसपास नजर दौड़ाता हूँ. कुछ ड्रेगन आकाश से रस्सी के सहारे झूल हैं. फिर कुछ क्रिसमस ट्री सजे हैं. झालर रोशनी का सामराज्य है हर तरफ. कोई संता बने घूम रहा है.
इससे तो कतई नहीं जान सकते कि यह बिजिंग है या वेन्कूवर या टोरंटो...
कुछ आसपास सजी दुकानों पर नजर डालता हूँ..वही चायनीज़ फूड, फिर पिज्जा पिज्जा, फिर मेकडोनल्ड फिर फिर..सब एक सी ही दुकानें हर जगह..भीड़ भी एक सीमित दायरे में कुछ वैसी ही...
आखिर दिमाग पर जोर डालता हूँ..जेब में हाथ जाता है.. मेरी टिकिट और पासपोर्ट हैं.
टिकिट पर लिखा है बिजिंग से टोरंटो, फ्लाईट एयर कनाडा १०१ दोपहर १२.४७ बजे तारीख १२ दिसम्बर, २००९.

और रामप्यारी माताजी ने ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत – 23 फ़िर से करवा डाली…और An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय पर अनुराग शर्मा जी ने बताया और चित्र भिजवायेले हैं..रजतमय धरती हुई [इस्पात नगरी से - २२]

पिछले हफ्ते से ही तापक्रम शून्य से नीचे चला गया था. रात भर हिमपात होता रहा. कल सुबह जब सोकर उठे तो आसपास सब कुछ रजतमय हो रहा था. बर्फ गिरती है तो सब कुछ अविश्वसनीय रूप से इतना सुन्दर हो जाता है कि शब्दों में व्यक्त करना कठिन है. चांदनी रातों की सुन्दरता तो मानो गूंगे का गुड़ ही हो. शब्दों का चतुर चितेरा नहीं हूँ इसलिए कुछ चित्र रख रहा हूँ. देखिये और आनंद लीजिये:

और ज्ञानवाणी पर वाणी गीत  जी पूछ रयेली हैं आप कभी झगड़ते नहीं .....!!….और शाश्त्री जी "शरद कोकास" की पहली और अद्यतन पोस्ट (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की) पढवा रयेले हैं ..और कोकास भाई की ताजी पोस्ट देखने का भाई…कोई चेहरा गाज़र के हलुवे की प्लेट सा लगता है

 

 

सुबह सुबह मुँह खोलो तो निकलती है ढेर सारी भाफ़ ..ऐसा लगता है कोई चाय की केटली रखी हो दिल के भीतर । आलिंगन के लिये बढ़ते हुए हाथ गर्म कम्बल की तरह दिखाई देते हैं , सुबह की गुनगुनी धूप में मफलर से लिपटा हुआ कोई चेहरा गाज़र के हलुवे की प्लेट सा  लगता है  ।दोपहर , जल्दी बाय बाय कहकर चली जाने वाली प्रेमिका की तरह और शाम नकाब पहनकर आती किसी खातून की तरह लगती है । रात पेट भरने के बाद रज़ाई में घुसते समय सुख के अहसास में इतनी उछल कूद होती है मानो कोई ज़लज़ला आ गया हो  ।

और राजकुमार ग्वालानी जी बोल रयेले हैं… मेयर का चुनाव लड़ रही है हमारी सहपाठी….

किरणमयी एक अच्छी वकील हैं। उन्होंने ही रायपुर के मेयर तरूण चटर्जी के खिलाफ हाई कोर्ट में एक मामला दर्ज कराया था, जब वे महापौर के साथ प्रदेश सरकार में मंत्री थे। उन्होंने जन हित से जुड़े कई मुद्दों पर मुकदमें लड़ हैं। ऐेसी प्रत्याशी को कांग्रेस ने मैदान में उतार कर प्रदेश की भाजपा सरकार की परेशानी बढ़ाई है। अब यह बात अलग है कि वह जीतती हैं या हारती हैं।
किरणमणी की छबि पर अगर मतदाता मुहर लगाने की मानसिकता बनाएंगे तो जरूर वह जीत जाएंगी, लेकिन मतदाताओं को अगर यह लगा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और कांग्रेस की मेयर बनने से विकास बाधित हो सकता है तो जरूर किरणमणी हार सकती हैं। अब यह तो मतदान के बाद होने वाली मतगणना से मालूम होगा कि क्या होता है।

और देशनामा पर गडकरी आ गएओ, रंग चोखा आवे न आवे, बीजेपी को भी कोनी पता...खुशदीप भाई बता रयेले हैं…


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52 साल के नितिन गडकरी वजन में ही भारी हैं...रही बात ज़मीन से जु़ड़ी होने कि तो जनाब ने आज तक जनता के बीच जाकर एक भी चुनाव नहीं जीता है...बैक डोर से महाराष्ट्र विधान परिषद में जरूर 1989 से एंट्री मारते आ रहे हैं...नब्बे के दशक के मध्य में ज़रूर छींका टूटा था...महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी सरकार में पीडब्लूडी मंत्री बनाए गए...नागपुर में संघ मुख्यालय के पास इतना विकास कराया कि अब संघ ने बीजेपी का विकास करने का ही बीड़ा थमा दिया...

और नीरज गोस्वामी जी किताबों की दुनिया – 20  के बारे में

 

सबसे पहले तो इस किताब के शीर्षक ने ही मुझे आकर्षित किया. इसी से मुझे शायर की नयी सोच का भान हो गया था, फिर जैसे जैसे मैं इसके वर्क पलटता गया, मेरी सोच पुख्ता होती चली गयी.

मौत की वीरानियों में ज़िन्दगी बन कर रहा


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वो खुदाओं के शहर में आदमी बन कर रहा

ज़िन्दगी से दोस्ती का ये सिला उसको मिला

ज़िन्दगी भर दोस्तों में अजनबी बन कर रहा

उसकी दुनिया का अँधेरा सोच कर तो देखिये

वो जो अंधों की गली में रौशनी बन कर रहा

एक अंधी दौड़ की अगुआई को बैचैन सब

जब तलक बीनाई थी मैं आखरी बन कर रहा

और ताऊजी डाट पर फ़र्रुखाबादी विजेता (149) : ललित शर्मा बन गये हैं….

और आज के विजेता हैं : ललित शर्मा जी,


ललित शर्मा said...
ई तो कुकुर है, अलार्म डाग
20 December 2009 18:44

अरे सरिट ये शर्माजी को ऊठा के लाने का…

इनसेईच जवाब पूछने का जरा….

अरे भाई शर्माजी की बडी बडी मूंछे हैं…पंगा नईं लेने का…वो तो मैं शर्माजी को फ़ोन करके पूछ लेंगा तो एईसेईच बता डालेगा ना जवाब….

तो ठीक है..सरकिट आज पूछ के मेरे कू बताने का..

हो ना…भाई आप काहे कू टेंशन ले रयेला है?  मैं है ना इदर….

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"बिट्टू बावल्यो" कूद पड्यो ब्लाग चर्चा में!

बिट्टू बावल्यो

पहली तो मैं था सबने परणाम कर आपणो परिचय बता द्य़ूं.. मैं हूं बिट्टू बावल्यो, वीरभूमी राजस्थान स्यूं। बिलाग मायं मनै घणो इंटरेस्ट है और आ चरचा मैं आपणी अंगूठा टेक घरआळी बिन्नी ने सुणाबा ताईं कर रह्यो हूं।

तू सुण रही है न बिन्नी..

तो सुण- जैंया आपणै गांव री चौपाल भरै है, वैंया ही यो ताऊ रोजिना चौपाल भरै है. ई चौपाल माय तो दिमागी कसरत भी है और घणो चोखो मजमो लागे है..

ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत – 22

मेरे प्यारे भक्त जनों, ताऊ की चौपाल मे मैं स्वयंसिद्धा माँ चैतन्या रामप्यारी साहिबा आपका स्वागत करती हुं. ईश्वर की अनुकंपा से आपका कल्याण हो. ताऊ की चौपाल मे सांस्कृतिक, राजनैतिक और ऐतिहासिक विषयों पर सवाल पूछे जाते रहे हैं. आशा है आपको यह प्रयास अवश्य पसंद आया होगा. अब बीच बीच मे (और रविवार को पक्का) मैं प्रवचन देने ताऊजी डाट काम पर आती रहूंगी. आपका दिन शुभ हो. आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हों, यही माताजी का आशिर्वाद!
भक्त जनों जोर से बोलिये स्वयंसिद्धा माँ चैतन्या रामप्यारी साहिबा की जय!

अठै तो मोट्यार भी है अर लुगायां भी.. आपां भी चालैलां

निर्मला जी तो आज वीर बहुटी माय छोटी सी बात कहता कहता ही घणी बड़ी बात कह गी। अर आपणा रतन जी कतरा काम की बात सिखा रह्या छै कि उबुन्टू में Evolution Mail कॉन्फ़िगर कैसे करें ?.. वैयां ये सब चीजां थारै जसी अंगूठा टेक ताईं कौनी।

पण तू या तो समझ जावैली न...

कैसी कीनी प्रीत बलमवा ? प्रेम-प्रीत की बात माय आखर पढ़बा की जरूरत कोनी पडै।

बीणनी तनै तौ पतो हि है कि थोड़ा टेम पहली ही आपणे नगर निगम रा चुनाव हुया हा। लै अब ईने सुण और समझ कि तू जीने वोट डाली वो काईं काईं करस्यी.. नगर निगम और न्यायालयों का स्वरूप : भारत में विधि का इतिहास-22

या लै.. ईने सुण.. जवाब नहीं बी एस पाबला का ...... ..... मैं खी कि पाबला जी को जवाब अय्यां ही थोड़ै ही मिलेलो.. पेली सवाल तो ल्याणो पड़सी न.. तू सवाल-जवाब की मत सोच.. तू तो हिमांशु जी की आ पोस्ट पढ़.. तनै खूब अच्छो लागैलो

करुणावतार बुद्ध -7

लै तू मनै एक दिन गधो बताई ही न... लै अब देख .. खुशदीप जी जस्यान का बिलागर भी काईं लिख रह्या है अपुन गधे ही भले...खुशदीप

अपुन गधे ही भले
कभी गधे को गौर से देखो
मासूम, ज़माने से डरा चेहरा
मक्कारी का नामोनिशान नहीं
शायद इसीलिए वो इंसान नहीं
गधा कभी प्रैक्टीकल नहीं होता
कोई कुछ कहे रिएक्ट नहीं करता
गधा उम्र भर गधा ही रहता है
काश वो अक्ल के घोड़े दौड़ा पाता
इंसान को इंसान से भिड़ा जाता
फिर कोई उसे गधा क्यों कहता


सोच रहा हूं खुद तन्हा बैठा
लोग मुझे गधा क्यों कहते हैं...

अर साथ ही ये भी जाण लै कि कुण ने काईं सम्मान मिल्यो ..श्रेष्ट ब्लॉगर सम्मान श्री महेंद्र मिश्र को (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की

आज घणी चोखी चोखी पोस्ट दिख री है मनै. या तो तू चोरी की मया सुण लै या KENNY ROGER'S SONG...LUCILLE.....संतोष शैल की आवाज़ में... गाणो सुण लै अर मने खुद को खुद से छलता पानी....का मजा लैबा दे

अब आगै चालां? चाल तू उपन्यास का अंश भी पढ़ सकै है

सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजय” शिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – ३२ [कर्ण का अन्तर्द्वन्द….]

लै तने आज शाम नै चूल्हो बाळबा की जरूरत कोनी

आज शिखा वार्ष्नेय तथा यूनुस खान का जनमदिन है

तो शाम ने अठै ही दाल बाटी रो जीमण है

तू काल टेलीविजन माय वो पिछला जन्म आलो सीरियल देख अर डर गी ही न.. लै ब्लॉगर माया तो आगला जन्म की बाता हो री है- राज !! अगले जन्म का? अर देख लै कि कुणके साथ अस्यो कोनी होवे

आपके साथ भी ऐसा होता है क्या ? (:

बीनणी तू अय्यां कर रसोई मं देख कर आ कि बिल्ली दूध तो न पी गी ... या पोस्ट थारै बई कोनी .. ईने मैं मन माय ही पढूलो.. 'नारी' की चिंता में दुबले कुछ ब्लॉगर मित्र !

लै देख कतरो बढ़िया कार्टून बनायो है.. थारे जस्या अंगूठा टेक बिलागर रो भी अठै घणो ध्यान राख्यो जावै है..

कार्टून:- लंबे हैं रे बंधू ये जीवन के रस्ते..

अर अगर तू या पोस्ट सुण ली तो फेर म्हारी खैर कोनी, ई लिए मैं ईने थारे सामने कोनी पढूला -


क्या नारी ही गृहिणी हो सकती है पुरुष हाऊस हसबैंड नहीं… क्या पुरुष को नारी का स्थान ले लेना चाहिये..
.. जो ईने घरआली के सामने पढ़ लिया और अब तक सही सलामत है वाके ताईं तो या ही कहनो पड़ेलो जाको राखे साईयां

देख ई वास्ते तनै धूजणी छूट री है- मेरे शहर में बर्फीला तूफान! अर ई पोस्ट पढबा के पाछे आपां ट्रेक्टर ने ही कार बनाबा का जतन करैला- कार के प्रकार [इस्पात नगरी से - २१]

थारै ताईं सबस्यूं जरूरी पोस्ट क्या आप खर्राटे लेते हैं 2 या है. अर सब नै जल्दी सूं घणो धन्यवाद बोल दै.. नहीं तो सब आपां ने कहवेला कि हम सब स्वार्थी हैं

और या देख दिगंबर नासवा जी कंई केवे जितनी चादर पाँव पसारो..समझगी ना? और चौकस रहबा को तरीको सीखले लविजा से हमेशा इफेक्टिव रहने वाला तरीका

Laviza

उस दिन घर पर खेलते खेलते मेरी नज़र कपडे धोने वाले साबुन पर पड़ गयी. अब ऐसे तो हो नहीं सकता ना की मैं उसे उठा कर थोड़ी जांच पड़ताल ना कर लूं :)

तो मैंने उठा लिया और उसका रैपर उतार कर जांचने के लिए जैसे ही मुंह में लेने वाली थी की मम्मी ने देख लिया और साबुन मुझसे लेकर ऊँचाई पर रख दिया.

और अब आखिर म सुण ले…अदा जी कंई केवे है बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी...

रात के तीन बजे हैं यहाँ Canada में...नींद खुल गयी मेरी...मेरा लैपटॉप बगल में था...अब तो आँख खुलती है तो भगवान् भी बाद में याद आते हैं पहले अपनी पोस्ट याद आती हैं..रश्मि का मेल था उसको जवाब दे दिया....रश्मि ने जागने के लिए फटकार लगाईं और विवेक जी का लिंक भेज दिया....कल से कुछ पढ़ नहीं पाई थी....पढ़ा तो माथा ही फिर गया...हमारे देहात में कभी एक कहावत सुनते थे बाबा कहा करते थे.....'तुमलोगों ने बन्दर के घाव कि तरह गींज कर रख दिया है'... मुझे भी लगा कि 'नारी' और 'नारी सम्बन्धी' बातों को ब्लॉग जगत ने भी गींज कर रख दिया है..... जिसका जो जी में आ रहा है कहता ही चला जा रहा है...हम नारी न हुए पंचिंग बैग हो गए....यूँ लग रहा है....पूरा ब्लॉग जगत ही भड़ासियों का कोना हो गया है....नारियों का अपमान खुले दिल से लोग कर रहे हैं.....टिपण्णी करने वालों से गुजारिश है...कृपया भद्र भाषा का प्रयोग करें.....किसी भी तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा...अगर आपको यह आलेख नहीं पसंद है तो टिपण्णी ही मत कीजियेगा..

हां तो बिन्नी अब तू घर को काम अर मैं चाल्यो दूकान…बाकी चर्चा मैं तन्ने कल सुनाऊलों…

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आसमान से टपक के बांस पे अटक गयेला है अपुन तो?

अरे आवो आवो सर्किट…कबी आयेला तुम?

भाई मै कल शाम कू आगयेला था भाई. और अबी का अबी आपको ब्लाग चर्चा का रस टपका डालता हूं.

पण सर्किट जल्दी करने का..भौत दिन हो गयेला है बाप.

हां भाई अबी लो ना..आप टेंशन नईं लेने का…मनविंदर भिंबर जी बता रयेली हैं उस खबर के अक्षर और उनकी अजमत….और आकांक्षा जी बता रयेली हैं एक आरती के क्रांतिकारी रचयिता...ओम् जग जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे के बारे में..और हिमांशु भाई पढवा रयेले हैं आचार्य शंकर की सौन्दर्य लहरी…अनिलकांत भाई बता रयेले हैं कि कैसे ख़्वाहिशों की शाम ढलती है !! और भाई अपुन के झा जी पढ़ डाली पोस्टें तमाम : चर्चा सरे शाम (चिट्ठी चर्चा )  कर रयेले हैं…और आशीष खंडेलवालजी पूछ रयेले हैं की क्या आप अपनी सारी टिप्पणियां पढ़ना चाहेंगे? 

 

अरे सरकिट…एक मिनट रुकने का…ये आशीष खंडेलवाल जी क्या पूछ रयेले हैं….अपनी टिप्पणीय़ां पढने का? 

हां ना…येईच तो पूछ रयेले हैं..

अरे सरकिट..जब अपुन ने टिप्पणीयां आज तक करीईच नईं हैं तो क्या *टा पढने का…तूई बोल ना..

अरे भाई..आप टेंशन नई लेने का…वो तो बस ऐसेईच…पूछ रयेले थे कि जब आप टिप्पणीयां कर डालोगे तो कबी ना कबी तो पढने का होयेंगा ना भाई? इसीलियेईच एडवांस मे बता रयेले थे..

अच्छा एडवांस यानि कि फ़्युचर मे?

हां हाई आप ठीक समझा ना भाई..आप काहे कू टेंशन लेता है भाई ..मैं है ना टेंशन लेने के लिये..?अब आप तो आगे सुनने का…  महक जी बोल रयेली है  रब्बा भले मैं क्यों ना सोती ही मर जाउँ |..

अरे सरकिट..आज ये क्या हो रयेला है? महक जी को बोलना..ऐसा नईं करने का….

अरे भाई आप काहे कू टेंशन लेता है? वो तो एक गजल सुना रयेली हैं…आप आगे सुनने का..अब मन का पाखी पर रश्मि रविजा जी पीक आवर्स" में मुंबई लोकल ट्रेन में यात्रा करवाते हुये लिख रयेली हैं कि…


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ट्रेन अपनी रफ़्तार से दौड़ी जा रही थी.हर स्टेशन पर उतरने वालों से दुगुने लोग चढ़ जाते,मैं थोड़ी और दब जाती.और सीटों पर बैठे लोग तो सब अंतिम स्टॉप वाले थे.मेरी स्टाईलिश सैंडल के तो क्या कहने.जब असह्य हो गया तो मैंने धीरे से सैंडल उतार दी.पर मुंबई कि महिलायें अचानक मेरी हाईट डेढ़ इंच कम होते देख भी नहीं चौंकीं.पता नहीं नोटिस किया या नहीं.पर चेहरा सबका निर्विकार ही था.तभी मेरे बेटे का फोन आया.और हमारी बातचीत में दो तीन बार रेकॉर्डिंग शब्द सुन,पता नहीं पास बैठी लड़की ने क्या सोचा.झट खड़ी होकर मुझे बैठने की जगह दे दी.(शायद मुझे कोई गायिका समझ बैठी:)..मैं थोडा सा ना नुकुर कर बैठ गयी.और सैंडल धीरे से सीट के अन्दर खिसका दिया.मेरा भी अंतिम स्टॉप ही था.सब लोग उतरने लगे पर मुझे बैठा देख,चौंके तो जरूर होंगे,पर आदतन कुछ कहा नहीं.सबके उतरते ही मैंने झट से सैंडल निकाले और पहन कर उतर गयी.

 

और भाई अल्बेला खत्री पूछ रयेले हैं है किसी के पास कोई जवाब इस सवाल का ?

अरे सरकिट..अपुन के पास भेज ना उनको? अपुन के पास सब मर्ज की दवा है..

अरे भाई आप काहे कू टेंशन लेने का..मैं अबी का अबी फ़ोन कर रयेला है ना…अबी आप बाकी चर्चा  सुनने का…उधर शेफ़ाली पांडे जी कुमाउँनी चेली पर  मज़े का अर्थशास्त्र ....

समझा रयेली हैं…


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वह कहती है ''मैं अपने पति से हर महीने की पहली तारीख को एक नई साड़ी और एक नया सूट लेकर रहती हूँ , नौकरी नहीं करती हूँ तो क्या हुआ?,आखिर मेरा भी कुछ हक़ बनता है''  हर करवाचौथ पर उसे व्रत करने की एवज़ में एक मुआवज़े के तौर पर सरप्राइज़ में सोने का बड़ा सा गहना ज़रूर मिलता है,

 

…पारूल…चाँद पुखराज का…… पर पारुलजी आबिदा परवीन -अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ सुनवा रयेली हैं…और एलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है?..........घुघूती बासूती जी पूछ रयेली हैं…जबलपुर-ब्रिगेड – पर जी.के. अवधिया कह रयेले हैं कि  यह कैसे हो सकता है कि जबलपुर ब्रिगेड हो और जबलपुर के बारे में जानकारी न हो…उधर जयपुर से प्रवीण जाखड पूछे रयेले हैं कि ...ये कौन 'पत्रकार' है….अबी अपुन को क्या मालूम भाई…कोई फ़िलिम स्टार का पूछे तो अपुन एक मिनट मे बता देंगा भाई…उधर डाक्टर साहब को कोफ़्त हो रयेली है और अपुन से पूछ रयेले है कि  क्या आपको भी कोफ़्त होती है हिंदी के ब्लॉग में रोमन में टिप्पणी पढ़कर ? हां डाक्टर साहब अपुन कू भौत होती है पण क्या करेंगा? भाई लोग तो इदर बी हिंदी के साथ साथ इंगलीश मे बी बूमा बूम ठोकता….अब अपुन ज्यादा बोलेगा तो भाई लोग बोलेगा आज कल चींटी को पांव निकल रयेला है…

 

"हे प्रभु यह तेरा-पथ" पर महावीर भाई नमस्कार महामन्त्र भाग-१ पढवा रयेले हैं…उधर देशनामा पर अपने तो अपने होते हैं...खुशदीप बता रयेले हैं और भाई इनका स्लाग ओवर सुनने का ..आज तो ललित भाई ने कुछ जवाब दे डाला…जवाब बोले तो  हरयाणवी टाईप का जवाब…

 


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स्लॉग ओवर
एक बार ललित शर्मा भाई मॉर्निंग वॉक पर निकले...किसी सिरफिरे ने सड़क पर केले का छिलका फेंक रखा था...ललित भाई को छिलका दिखा नहीं और जा फिसले...पार्क के पास ही एक गधे महाराज घास पर हाथ साफ कर रहे थे...ललित भाई का बैलेंस बना नहीं और वो गधे के पैरों के पास जा गिरे...वहीं एक सुंदर सी मैडम खड़ी थी...मैडम से हंसी रोकी नहीं गई और चुटकी लेते हुए ललित भाई से बोली...क्यों सुबह-सुबह बड़े भाई के पैर छू रहे हो क्या...ललित भाई भी ठहरे ललित भाई...कपड़े झाड़ते हुए उठ कर मैडम से बड़े अदब से बोले...जी भाभी जी...

 

और संगीता पुरी जी की ये रही मेरी 250 वीं पोस्‍ट .. आप सभी पाठकों का बहुत बहुत शुक्रिया !!

अरे सरकिट..संगीता जी को बधाई दे डाल अबी की अबी..और अपुन और मुन्नी मेंटेन की जन्मपत्री बी मिलवा डाल अबी की अबी..

अरे भाई आप खाली पीली काहे कू टेंशन लेता है? अपुन ने पहलेईचई बधाई दे दी ना..और जन्मपत्री तो अपुन खुशदीप भाई कू दे के आयेला है..जन्मपत्री मिलवाने और शादी का मुहुर्त निकलवाने का काम खुशदीप भाई उनके जिम्मे लियेला है..जैसेईच मुन्नी भाभी की जन्मपत्री मिलेंगी…लग्न का मुहुर्त पक्काईच समझिये…और विवेक रस्तोगी आपको बता रयेले हैं बचत खाते से ज्यादा ब्याज कैसे प्राप्त करें, स्वीप इन जमा खाता एक बेहद उम्दा रास्ता..और काजलकुमार जी कार्टून:- जब मुंह दिखाए न बने तो हाथ दिखाओ..और बस काजल भाई के इतना बोलते ई खुशदीप भाई ने ताऊ का पिछला जन्मईच देख डाला "राज ब्लागर के पिछले जन्म के" खुशदीप ने उगलवाया ताऊ की शादी का राज..

 


खुशदीप : हां हां..ताऊ झंडू, बता बता और आगे चल..अब आई असली बात..जो इस सीरीयल को हिट करवायेगी...


ताऊ झंडू : अब इसके बाद हमने घोषणा कर दी कि हम करेंगे झुनिया से शादी...हमारे इतनी घोषणा करते ही हमारे चेले चमचे जो कि ट्रेंड थे, उन्होने हमारी जयजय कार के नारे बुलंद कर दिये और किसी को कुछ समझ आता उसके पहले ही पंडित चंपू बंदर जी ने झुनिया का हाथ पकडकर हमारे हाथ मे दे दिया और सात चक्कर खिलवा दिये फ़ेरों के नाम पर...बस हमारे इस कार्य कि बहुत भूरी भूरी प्रशंशा हुई. अगले दिन जंगल के सारे अखबार जो कि हमारे ही सेट किये हुये थे...उन्होने जबरदस्त कवरेज दिया और हमारी ख्याति गरीब का मसीहा के तौर पर चहुं और फ़ैल गई.......

और तीसरा खंबा पर कोलकाता में अंग्रेजी बस्ती : भारत में विधि का इतिहास-20…बता रयेले हैं वकील साहब…और अजित वडनेरकरजी  शब्दों का सफर पर   जल्लाद, जल्दबाजी और जिल्दसाजी  के बारे मे बता रयेले हैं…और राजकुमार ग्वालानी  राजतन्त्र पर बोल रयेले हैं कि तेरे बिना अब जिया जाता नही..और 'अदा' जी  काव्य मंजूषा     पर बता रयेली हैं कि मेरा घर मेरे बच्चे..  यानि उनका छोटा बेटा घर आयेला है…

 

मृगांक शेखर की उम्र १९ साल है और वो USA में मेडिकल स्टुडेंट है.....हमेशा हर चीज़ में अव्वल रहा है चाहे वो खेल का मैदान हो....debate , dramma drawing पेंटिंग , फिल्म making या फिर लीडरशिप ...उसके लिए सबकुछ आसन है.... कनाडियन गवर्मेंट से मेलेनिअम स्कॉलरशिप का भी रेसिपियंत है मृगांक...

 

और Oops!! What am I thinking!!! पर गुरु आगयेले हैं…

अरे सर्किट एक मिनट…ये तो मेरे को उडनतश्तरी लग रयेली है बीडु?

अरे भाई आप टेंशन नईं लेने का…आप बिल्कुल ठीकईच समझेले हैं..ये उडनतश्तरीईच है..बस ये जरा इंगलिश स्टाईल की है..और भाई ये आदित्य आजकल हट मे रहने लगा है…

अरे सरकिट पण..हट मे काहे कू? इत्ता छोटा प्यारा सा बालक कू हट मे किसने भेजा रे? अपुन को बता..अपुन अबी की अबी खबर ले डालता उसकी..

अरे भाई आप टेंशन काहे कू लेता?..वो ऐसेईच मस्ती मे उधर रहता थोडी देर…पण बाद मे तो उसके दादाजी के पासईच रहता ना…और मुकेशकुमार तिवारीजी बता रयेले हैं कि कोई अकेला तो नही बूढ़ा होता…और अनवरत पर वकील साहब बता रयेले हैं वडनेरकर जी की टाइम मशीन ने कराई भूतकाल की सैर - लगाई गांठें और बनाए गैजेट्स…और अंतर सोहिल ताली बजाना सिखा रयेले हैं..दे ताली…और भाई आपको खोपडा खाली करने का होयेंगा तो ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत – 20 करने का जाकर….और आजकी चकाचक और सबसे टिप्पणी जुगाडू पोस्ट है अरविंद मिश्रा जी की क्या विवाहिता को सुश्री कहना अनुचित है?(मायिक्रो पोस्ट)…और ललित शर्मा जी पूछ रयेले हैं कि पनघट मैं जाऊं कैसे?

 

और पी.सी.गोदियाल जी  अंधड़ ! –पर  जीवन सच ! बता रयेले हैं… और डॉ टी एस दराल  अंतर्मंथन पर आइये आपको सैर कराते हैं, कनाडा के एल्गोन्क़ुइन पार्क की -

 

इसी ख़ुशी में चलिए आज आपको सैर कराते हैं ओंटारियो कनाडा मेंस्थित एल्गोन्क़ुइन प्रोविंसियल पार्क की।
प्रस्तुत है इस पार्क में बिताई तीन रातों का विवरण ---कैम्पिंग इनएल्गोन्क़ुइन पार्क।
टोरोंटो से करीब ३०० किलोमीटर दूर, ७७०,००० हैक्टेयर में फैलेइस पार्क में जाने के लिए टोरोंटो से नोर्थ की ओर हाइवे नंबर ४००से होते हुए , हंट्सविले होकर जाया जा सकता है। इस पार्क केदक्षिण छोर से होता हुआ एकमात्र हाइवे नंबर ६० , पार्क के अन्दरसे होता हुआ जाता है। बाकी सारा पार्क खाली जंगल है।
जंगल में भालू, भेड़िये , हिरन और मूज़ नाम के जंगली जानवरों की भरमार है।

और Giorgia  मेरा बिन्दाज़ हिंदी ब्लॉग

पर घीसू और माधव पढवा रयेली हैं और जो कि बेल्जियम से शायद अकेली ही गैर हिंदी भाषी हिंदी प्रेमी हैं…उनके परिचय मे वो कुछ इस प्रकार लिख रयेली हैं…

 

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Giorgia

graduate in Hindi, Sanskrit and Indian studies (BA), Anthropology (MA) and systems theory (Post-MA),36, married with a fantastic husband, owning a boutique bed&breakfast in Belgium and engaging in different other projects: guiding tours in India, developing a distance education course Hindi for dutchspeakers, creating my own company in new delhi, doing an internship at the moment with a wonderful newspaper "I-Next" in Lucknow etc, etc

 

और इसके बाद मे पं.डी.के.शर्मा"वत्स"  ज्योतिष की सार्थकता पर बता रयेले हैं शनि गोचर भ्रमण का विभिन्न राशियों पर प्रभाव (17 दिसंबर 2009 से 13 जनवरी 2010 तक).. और भाई इसके बाद मे राज भाटिया जी को  पराया देश पर कुछ गलत फ़ेमिली हो गई और उन्होने मुह के छाले को कुछ औरईच समझ लिया..पण बाद मे डाक्टर ने समझाया तब खुदईच बोल रयेले हैं कि जिन्दगी का हिसाब किताब कुछ इस तरह होता होयेंगा…

 

रज-भतिअ

आशा करता हुं आप सब मुझे माफ़ करेगे बिना बताये जाने के लिये, ओर कल से फ़िर आप सब के ब्लांग पर नियमित हाजरी भरूंगा, वेसे दिन मै कई बार आप सब के ब्लांग पर आता, फ़िर बन्द कर देता, ओर आप सब से निवेदन है कि बिना डाकटर की सलाह के अपने दिमाग मै कभी भी मेरी तरह ऎसी बात मत बिठाये.
कल से सब पहले जैसा चलेगा, क्यो कि अब मुझे ३ जनवरी तक छूट्टियां  है, आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होने मैरा हाल चाल किसी भी रुप मै जानाना चाहा,ओर मै माफ़ी चाहूंगा कि आप मै से कई लोगो के मेल का जबाब ना दे पाया.

दीपक मशाल  मसि-कागद पर  आस्तीन के सांप.. के लिये बता रयेले हैं और  श्यामल सुमन  मनोरमा बोल रयेले हैं वही बात कहो  और श्रीश पाठक 'प्रखर'  नवोत्पल साहित्यिक मंच पर पूछ रयेले हैं उसे बचाए कोई कैसे टूट जाने से 

 

और अब

 

 

इस वर्ष का हीरा लाल गुप्त "मधुकर" स्मृति सम्मान श्री गोकुल शर्मा दैनिक भास्कर जबलपुर ,सव्यसाची अलंकरण श्री सनत जैन भोपाल को तथा श्रेष्ट ब्लॉगर सम्मान श्री महेंद्र मिश्र को

 

 

अरे सर्किट तो मिश्राजी को बधाई दे डालने का अबी का अबी…

अरे भाई आप काहे कू टेंशन ले रयेला है? मैं दिया ना अबी की अबी उनको बधाई…और भाई पंकज मिश्रा अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!! पर  क्रिया कर्म करवाने का खर्च सिर्फ़ ११ रुपये –पन्डित…पर बोदूराम पंडित के कारनामे बता रयेले हैं..

 

अब तो सोहन सेठ को मुंह मागी मुराद मिल गयी ...और  तुरंत तैयार हो गए...क्रिया कर्म संपन्न हुआ तो सोहन सेठ ने बोदूराम को ११ रुपये देकर चरण  स्पर्श कर चलना चाहा ...तो बोदूराम ने कहा - जजमान एक बात और है मेरे कर्म कराने के बाद कर्म करवाने वाला व्यक्ति शरीर  पर जो कुछ भी धारण किया है उसे देना पड़ता है नहीं तो आगे शनिचर को उसका मौत हो जाता है...सोहन सेठ को तो करंट लग गया करे तो क्या करे?

अंततः सेठ के द्वारा शरीर पर पहने हुये सोने की चन , हीरे की अंगूठी, कडा और और सारे कपडे, यहां तक की  अंडरवीयर भी उतरवा लिया ..कुल मिलाकर  लगभग १ लाख तक का सामन  ऐंठ लिया और  सेठ से बोले -
बोलो बेटा पंडित बोदूराम की जय!
सेठ  बेडे दबे मन से  कहा - पंडित बोदूराम की जय!!!

और अदाजी की गजल मैं ऊँचाइयों का शिकार हूँ…पढिये काव्य मंजूषा पर…और राजकुमार ग्वालानी जी की राज खुला हमारी पिछली टिप्पणियों का-शुक्रिया आशीष खंडेलवाल जी का

…  लावण्या जी  लावण्यम्` ~अन्तर्मन्`  पर बता रयेली हैं भारत में , और विदेशों में भी भारत के सब से ज्यादह प्रसिध्ध नेहरु परिवार के कुछ अज्ञात या कम जाने पहचाने सदस्यों के बारे में और कुछ कवितायेँ भी ...    वाणी गीत  ज्ञानवाणी पर बता रयेली हैं दिल और दिमाग की कहासुनी  हिमाशु भाई चर्चा हिन्दी चिट्ठो पर बता रयेले है कि मैं रुका रहा किसी बाँस की डाली की तरह.. (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की )….

 

और भाई अब रामप्यारी की पहेली आज जीत ली है फ़र्रुखाबादी विजेता (147) : प.डी.के.शर्मा "वत्स" बन गयेले हैं…

अरे तो सर्किट पण तू ये मंदिरा बेदी की फ़ोटो काहे कू दिखा रयेला है बाप?

अरे भाई येईच तो वो फ़ोटो है जिसकी आंख पहचान कर वत्स जी आज के फ़र्रुखाबादी विजेता बन गयेले हैं..

ओहो..अबी समझा..

अच्छा भाई अब अपुन चलेगा..क्या?  आज जुम्मा है ना और जुम्मे को अपुन हफ़्ता वसूली करता है ना..नईं तो लोग निकल जायेंगे…मैं अबी की अबी गया और अबी की अबी हफ़्ता वसूली करके वापस आता है ना भाई…

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भाई वो बोल रयेला है…अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?…..

हल्लो अरे मुन्ना भाई ..मैं सर्किट बोल रयेला हूं दिल्ली एयरपोर्ट से…

क्या बोलने का जल्दी बोलने का…सरकिट..अबी अप्न के पास टाईमईच नई है मैन….अबी मुजकू रेडियो टेशन जाने का है रे मैं..

अरे भाई पण आप रेडियो टेशन जायेंगा काहे से? इदरीईच मैं एक कार देखेला हूं डाक्टर दराल के पास ..ऊठा के लाने का क्या? पण आप देख लो पहले..फ़िर अपने को नई बोलने का कि सर्किट ये क्या लेके आयेला है?


 

हां तो भाई ये गाडी के बारे डा. दराल साहब बता  रयेले हैं..दिल्ली का निगम बोध घाट --एक अन्तिम पड़ाव ---दी अल्टीमेट डेस्टिनेशन.

ये स्मार्ट कार , जी हाँ इसका नाम ही स्मार्ट कार है , मोंट्रियल सेक्यूबेक जाने वाले हाइवे पर टिम होर्तन्स के आउटलेट के बाहर देखी थी।
मुझे पूरा विश्वास है की श्री समीर लाल जी इसके बारे में पूरा डिटेल्स पता लगाकर बता देंगे।
तो क्या ख्याल है एजेंसी लेने के बारे में ?
बुकिंग कराने के लिए तो हम तैयार हैं।
नोट : यह पोस्ट उन लोगों के लिए है जो कार चलाते हैं और अकेले ऑफिस जाते हैं।और उनके लिए भी जो कार चलाने की तमन्ना रखते हैं।

आगे आशीष खंडेलवाल जी विजेट सुधारः टिप्पणियों की कुल संख्या अब ठीक है – के लिये बता रयेले हैं..

करीब आठ-दस दिन से ब्लॉगर साथियों की शिकायत मिल रही थी कि ब्लॉग पर टिप्पणियों की कुल संख्या दिखाने वाला विजेट इनकी संख्या कम दिखा रहा है। व्यस्तता के चलते मैं इसे समय नहीं दे पाया। कल रतन सिंह जी शेखावत ने टिप्पणी कर एक बार फिर इस ओर ध्यान दिलाया और उसके बाद ताऊ रामपुरिया जी ने भी इसे जल्द से जल्द सुधारने का नोटिस भेजा, जिससे वे ताऊजी डॉट कॉम पर कुल टिप्पणियों की संख्या का पता लगा सकें।

सच्चा शरणम पर हिमांशु भाई करुणावतार बुद्ध –5 पढवा रयेले हैं…

 

वनदेवता - ओ ब्रह्माण्ड  को ज्योतित करने निकले अमल ज्योतिपुंज ! ओ अनंत के अभ्र ! अपनी तृषित धरती को अमृत दो । बोध-स्रोतस्विनी की सदानीरा धारा सृष्टि को नहला दो । कृतार्थ कर दो जगत की चिर अभिलषित निर्वाण-पीठिका को ! कुछ ही कदमों पर एक तपस्विनी का कुटीर तुम्हारी प्रतीक्षा में कब से मुक्त कपाट है । दो प्रवीण ब्राह्मण तुम्हारे संग चलकर पथ-दर्शन करेंगे । मैं वनदेवता तुम्हारा आह्वान कर रहा हूँ ।

 

 

और भाई अनवरत पर वकील साहब बता रयेले हैं कि दुल्हन ले आए, ताऊ-ताई को छोड़ आए – और ताऊ वहां खुदईच बोल रयेला है कि ये ताऊ और ताई दोनोईच बावलीबूच सैं.  और KHAJANA NOW जबलपुर-ब्रिगेड पर भजन: सुन लो विनय गजानन संजीव 'सलिल' – और डर: एक माईक्रो कथा – सुना रयेले हैं उडनतश्तरी.

 

toronto

 

अरे मुन्ना भाई गजब हो गयेला है….

अरे सर्किट..खाली पीली..काये कू भंकस मार रयेला है बीडू? कुछ बोलेंगा बी की एईसेईच सब…

अरे भाई वो श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के आश्रम मे दो बाबा लोग और आ गयेले हैं…

अरे सर्किट कौन से बाबा लोग आयेले हैं?

अरे भाई वो बी दोनों बडे सिद्ध बाबा हैं…मैं सोच रयेला था उन तीनों बाबा लोगों को इदरिच बुला कर एक हवन करवाने का भाई..उससे आपका शादी तुरंत मुन्नी मेंटेन भाभी से जल्दी हो सकता है भाई..

अरे तो सर्किट जल्दी मिलवा ना उन तीनों बाबा लोगों से…

ये लो मिलो ना भाई तीनों से

स्वयंसिद्ध श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी महाराज

 
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मुख्य महंत बाबा श्री ताऊआनंद महाराज

 

svami lalit1

महा-प्रबंधक महंत स्वामी ललितानंद महाराज

अरे सर्किट ..बाबा लोग कुछ ताबीज वाबीज बी देते हैं क्या?

अरे भाई..बडे सिद्ध बाबा है…सब कुछ सामान है उनके पास…

 

chamatkaar चमत्कारी सर्वसिद्धि यंत्र babajilocketअभिमंत्रित लॉकेट ringजागृत अंगूठी

 

अरे वाह सर्किट..एक काम करने का..ये सब ताबीज सहित इन बाबा लोगों कूं ऊठा के इदरईच ले आने का…अपुन के वास्ते हवन पानी करवाने ..और बाद मे वापस छोड देने का..क्या?

अरे भाई आप काहे कूं टेंशन ले रयेला है? अपुन अबी का अबी बात कर डालता है ना इन बाबा लोगों से….

 

और भाई शिल्पकार के मुख से  सुनने का निज अंगुष्ठ संभालिये ये ना चोरी होय!!!!…और विवेक रस्तोगी ने हैकर्स लोगों की पोलपट्टी खोल डाली है हैकर्स ने गूगल क्रोम बनाकर लांच भी कर दिया और डाउनलोड के लिये भी उपलब्ध है.. (Download Google ChromiumOS Free) -  ….और शेखावत जी namebench के साथ करें DNS Server सर्च – की जानकारी दे रयेले हैं…और An Indian in Pittsburgh - पिट्सबर्ग में एक भारतीय वाले अनुराग शर्मा भय - एक कविता – सुना रयेले हैं….और Dr. Smt. ajit gupta कह रयेली हैं कि

दिसम्‍बर में आएंगे घर-घर में राम…..और अंतर्सोहिल पर्यावरण प्रदूषण (निवारण और समाधान) के उपाय बता रयेले हैं…और वीर बहुटी निर्मला जी बता रयेली हैं की *ढोंगी बाबा सचिदानन्द निकला कातिल *…..और तीसरा खंबा पर मुकदमों के निपटारे की अवधि कम करने की कवायद के बारे मे बता रयेले हैं वकील साहब…..

और हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन  वाले ब्लाग पर पाबलाजी बता रयेले हैं कि आज पंकज सुबीर की वैवाहिक वर्षगांठ है

अरे तो..सर्किट…गुरुजी को बधाई दे डाल ना अपुन की तरफ़ से..

अरे भाई आप टेंशन नई लेने का..मैने गुरुजी को बधाई दे डाली है ना..आप आराम से चर्चा सुनने का…और भाई वो GULDASTE - E – SHAYARI वाली बबली जी एक महिने की छूट्टी जारयेली हैं…..

 


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प्रिय मित्रों
मैं एक महीने के लिए छुट्टी पर जा रही हूँ ! आप सभी कोबहुत याद करुँगी! क्रिसमस और नए साल की हार्दिकशुभकामनायें आप सब को और आपके परिवार को!

अब भाई निरन्तर  पर कुछ हास्य-परिहास हंसी ठिठोले जोग..सुना रयेले हैं मिश्रजी…मन का पाखी पर गावस्कर के 'स्ट्रेट ड्राईव' का राज़ !!…और खेती बाडी पर कहीं इंसान भगवान बनने की कोशिश में तो नहीं है! …और उच्चारण पर "कोई नही सुनता पुकार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") – ये शाश्त्रीजी बोल रयेले हैं….और मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!! गलती सुधार रयेले हैं..मुझे अफ़सोस है.. .गलती का सुधार कर रहा हूँ. : महफूज़  भाई  और मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति पर झूठा सच बनाम समाजशास्त्र – के बारे में बता रयेले हैं अनिलकांत भाई…और देशनामा पर दिलीप साहब जिओ हज़ारों साल...खुशदीप –बोल रयेले हैं…

अरे सर्किट वो खुशदीप भाई से पूछने का…मुन्नी मेंटेन को पेरोल मिला क्या रे?

अरे भाई आप टेंशन नईं लेने का..वो जैसाईच मिलेगा..खुशदीप भाई कंटेक्ट करेगा ना अपुन से…मैं सब उनकू समझा दियेला है भाई…और वो आँचल !!!.. कहानी सुना रयेली हैं “अदा जी”

 

कहते हैं न शुरू में आप शराब पीते हैं फिर शराब आपको पीती है...संजय भईया भी कहाँ अपवाद थे....होते-होते शराब ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया...उनको लीवर सिरोसिस हो गया और ६ फीट का आदमी ४ फीट का कैसे हो जाता है यह मैंने तभी देखा था....खूबसूरत बदन हड्डियों का ठठरी हो गया था.....शीला भाभी ने अपनी आँखों की नींद को अपने पास महीनों नहीं फटकने दिया....आँचल पसार-पसार कर सारे व्रत कर गयी थी वो....लेकिन भगवान् को तो अपना काम करना था .....एक दिन संजय भईया को इस दुनिया से जाना ही पड़ा...शीला भाभी और विशाल को छोड़ कर....अब घर में मात्र शीला भाभी, विशाल जिसकी उम्र २-३ वर्ष कि थी और पाण्डेय जी रह गए.....

 

 

इसका पीछू…

और दो पल रुका यादों का कारवाँ – ये गीत सुना रयेली हैं  गुनगुनाती धूप. पर अल्पना वर्मा जी और राज पाहवाजी…

 

 

अब भाई इसके पीछू कुछ गडबड हो गयेली है…

अबे सर्किट…तू खाली पीली दिमाग का दही बना रयेला है….बोलता काहे कू नई…

अरे भाई क्या बोलेगा उधर वो ताऊ डॉट इन पर ताऊ पता नई क्या बूम मार रयेला है?

अबे बोलता काहे कू नई? क्या बोल रयेला है ताऊ?

भाई वो बोल रयेला है…अरे सत्यानाशी ताऊ..मैने तेरा क्या बिगाडा था?…..


किश्शू गधेडा जो कुंये मे झुककर अपना हाथ रुपकला की तरफ़ बढा रहा था और उसको उचक कर अपना हाथ पकडने को कह रहा था ..वो भी भागने की तैयारी करने लगा...शेर धीरे धीरे नजदीक आता जा रहा था. चम्पा भाभी ने किश्शू से रुकने की बहुत गुजारिश की..पर आज किश्शू ने सिद्ध कर दिया कि लैला मजनूं का जमाना और रहा होगा..आज के जमाने मे..जान इश्क से उपर है. और सही भी है..जान बचेगी तो इश्क लडाने वालियां और बहुत मिल जायेंगी...सो किश्शू भी भाग लिया. वाह रे इश्कबाज..!

और भाई आपको जादू देखना होयेंगा तो आदित्य (Aaditya) भी जादू!! दिखा रयेला है. और चर्चा हिंदी चिठ्ठों की पर रुपा गधेडी पर डोरे डालने को शेर बना किश्शू गधेडा (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की ) पढने का भाई..

और राजतंत्र पर

लंबी चली चर्चा- कोकास जी से पूछे कितना हुआ खर्चा  ये पूछने के साथ ही सुखद ब्लस्ट करने की गारंटी बी ले रहे हैं ग्वालानी जी….और  अंधड़ ! पर गोदियालजी अंधे आगे नाच के, कला अकारथ जाए ! एइसा बोल रयेले हैं…

 

और भाई ताऊजी डाट काम पर मक्खी पहेली फ़र्रुखाबादी विजेता (139) : संगीता पुरी ने जीत ली है….और गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पर  अपने बचने के लिए कुछ भी करो .. पर धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा !! ये कह रयेली हैं संगीता जी…और घुघूतीबासूती जी बता रयेली हैं एक बल्ब जलाना चाहते हैं तो दो लाख रुपए का जुगाड़ कर लें ! ....घुघूती बासूती -  और समयचक्र पर चिट्ठी चर्चा : ये भी भला कोई वक्त है...अब आने का.  पूछ रयेले हैं महेंद्र मिश्रजी..और ज्योतिष की सार्थकता पर प.वत्स जी बता रहे हैं भाग्य और पुरूषार्थ का महत्व-------(आधुनिक दृ्ष्टिकोण)


ये रिश्ते वाली कविता इदर हीरल बेन के ब्लाग पे पढने की...
अथवा
साथ गुजारे गये पलों को?
जो नींव की पक्की इंटो की तरह
रिश्तों को मजबूत बनाते होंगे?

पर
नहीं शायद
आजकल नींव की ईंटे भी कच्ची हैं।

और भाई अब ये Vyom ke Paar...व्योम के पार पर ये अल्पना वर्मा जी का संस्मरण 'अपनी शर्तो पर जीना'  पढने का भाई…इसी पोस्ट के साथ यह सुंदर गीत भी अल्पना जी की आवाज मे सुनने का भाई.

'रात और दिन दिया जले ,मेरे मन में फिर भी अंधियारा है,
जाने कहाँ है वो साथी ,तू जो मिले जीवन उजीयारा है'

 

महीने भर बाद शादी करके आई तब बेहद खुश थी ,मगर चेहरे पर कोई मेकअप नहीं देख कर सब ने सवाल कर डाले..
उसने बड़े गर्व से कहा की उसके पति उस से इतना अधिक प्यार करते हैं वे नहीं चाहते की उन के अलावा कोई और उस को देखे.हम मज़ाक में कहते थे की अमल ध्यान रखना उन्हें नौकरी मिल जाएगी तो तुम्हें तो ताले में बंद कर के जाया करेंगे!वह स्टाफ रूम मे आते ही सब से पहले अपने लोकर से मेक अप का समान निकालती और इतमीनान से सजती ,घर जाने से पहले चेहरे से सारी सजावट उतारती.

 

 

भाई..अब मेरे कू जाने का है…आप को मैं बाकी कल आके सुनायेंगा ना….

ठीक है सर्किट पण जल्दी आने का..

हां जल्दी आता है ना मैं भाई..आप टेंशन नईं लेने का भाई….

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