बुधवार, 10 फ़रवरी 2010

गधे ब्लागिंग क्युं करते हैं? संतू गधा पूछ रयेला है आपसे!

सर्किट भाई आप सबकू सलाम नमस्ते कर रयेला है….और आगे की चर्चा सुना रयेला है. मुन्ना भाई अबी तो सो रयेले हैं..अपुन का नींद उखड गयेला तो मैं ये चर्चा बांचने कू लग गयेला है…आप बी सुनने का अगरबत्ती लगाके…आप लोग  अगरबत्ती लगाके चर्चा सुनेगा तो आप की पोस्ट हिट होयेंगी..तो अबी अगरबत्ती लगाने का और चर्चा सुनने का…

 

मेरी दुनिया मेरे सपने पर ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ भाई बोल रयेले हैं.. वर्ष 2009 के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर्स हेतु संवाद सम्मान:- 20 श्रेणियाँ, 250 नामांकन। नाम फाइनल करने में 'नाकों चने चबाना', 'पहाड़ चीर कर नहर बनाना', 'लोहे के चने चबाना' जैसे सारे मुहावरे सार्थक हो गये। -

 

और झकाझक टाइम्स पर दिल्‍ली ब्‍लॉगर मिलन या मोबाइल मिलन हो रहा है : मजा न आये तो पैसे वापिस (अविनाश वाचस्‍पति) कर रयेले हैं… और पहेली बी पूछ रयेले हैं…

 

हंसते खिलखिलाते ब्लागर…

ये जज्बा कायम रहे….

विचार विमर्श मे मग्न…


मुंह में गुलाब जामुन भरकर
फ़ोन के पीछे मुंह छिपाये…ये कौन? येईच है पहेली….

 

संचिका पर मिथकों का मानव के अवचेतन पर प्रभाव - ५ (अंतिम भाग) पढने का….  मेरी कृति पर राजस्थान का लोक नृत्य की तस्वीरे देख सकते हैं…

 

टिप्पी का टिप्पा टैण टैणेन . कर रहे हईम अजय झा जी…आप टीप के निकल जाते हैं, हम उसे यहां टिकाते हैं….

 

भाई खुशदीप के देशनामा पर

Udan Tashtari said...

मेहमान-ए-खुसुसी :)
राज जी और कविता जी की उपस्थिति ने आयोजन को अन्तर्राष्ट्रीय बना दिया जी.
एक ही साल में यह असर खुशदीप ब्लॉगिंग का की यंगनेस जाती रही..अब समझ में आ रहा है मुझे अपने लिए कि चार साल में मेरी क्या दुर्गति हुई है वरना मियाँ, हम भी जवानों के जवान थे कभी. :)
महफूज़ की शादी तो खैर कई वजहों से जरुरी हो गई है, उसमें यह वजह और आ जुड़ी. अब तो मार्जिन बहुत बारीक बचा है. :)
दराल साहब का हरियाणवी किस्सा जोरदार रहा!
सरवत जमाल साहेब की उपस्थिति उल्लेखनीय रही. हमारे गोरखपुरिया भाई जी हैं.
खाने से ध्यान हटाने की कोशिश में अपना नाम और उल्लेख ठीक खाने के मेनु के बाद देखना कितना सुखद रहा कि क्या बताऊँ..सब आप लोगों का स्नेह है.
सब देख सुन कर आप सही कह रहे हैं हिन्दी ब्लॉगिंग के बढ़ते कदमों को कोई नहीं रोक सकता.
जय हो हिन्दी!! जय हो हिन्दी ब्लॉगिंग!! जय हो हिन्दी ब्लॉगर्स!!

February 8, 2010 11:51 PM

हमारा टिप्पा:-…बिल्कुले ठीक कहे हैं आप कि दुनो जन राज भाटिया जी और कविता जी के आने से हम लोग का मीट इंटरनेशनल लुक मिल गया , बस एक आप जाते तो हम लोग एस्ट्रोनौटिकल मीट कर लेते …..और गजब का शोर मच जाता कि …….इंसानो और एलियन जी ने भी आपस में की ब्लोग्गिंग मीट ।……..ई महफ़ूज़ भाई की शादी और भी बहुत कारण से जरूरी है ……अरे तो हमको समझ में नहीं आता कि ई महफ़ूज़ भाई अपनी लाईफ़ में से ई मोडरेशन काहे नहीं हटाते हैं ?? खाने के मीनू के बाद आपका नाम आया ……….एक दम ठीक आया ….उससे पहले आता तो ……बचता का ………न मीनू….न खाना ? केतना ध्यान रहता है ….भोजन पर । आईये आपके वाले ब्लोग्गर मीट में तो खास तौर से ब्लोग्गर व्रत मीट ( बताईये …व्रत और मीट ..एक साथ राम राम ) रखा जाएगा ॥

 

ताऊजी डॉट कॉम पर खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (191) : आयोजक उडनतश्तरी पूछ रयेले हैं ये पहेली…

 

जवाब देने का….

 

अंधड़ ! पर गोदियाल जी पूछ रयेले हैं…क्या वोट-बैंक सचमुच इतना अक्लमंद है ?

 

My Photo

खैर, अपने इन राजनेतावो की तो कहाँ तक तारीफ़ करे, मगर मुझे आश्चर्य उस वोट बैंक पर होता है जिसे ये इस्तेमाल कर रहे है, अपने फायदे के लिए ! क्या वोट-बैंक वाले इतना भी नहीं समझते कि इनका उद्देश्य क्या है ? कल चुनाव हो जायेंगे तो वहाँ भी आन्ध्रा की तर्ज पर कोई कोर्ट आरक्षण को अवैध करार देगा! और ये फिर से कहलायेंगे, बहुसंख्यको द्वारा शोषित लोग ! मगर लाख टके का सवाल यह है कि इन राजनेताओ को इस वोट बैंक को इतना बुद्धिमान समझने का नुख्सा दिया किसने ?

उच्चारण पर "समझो तभी बसन्त!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) पढवा रयेले हैं…

 

मेरा परिचय यहाँ भी है!

जैसे-जैसे आ रहा, प्रेम-दिवस नज़दीक।
गोवा और मुम्बई के, लगे चहकने बीच।।
तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।
दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।।

कुछ भी...कभी भी. पर दिल्ली ब्लोग बैठक ( सिलसिलेवार रपट नं ३) झा जी अगली रिपोर्ट जारी कर रयेले हैं….

jhaji

 

इसी बीच फ़ोन पर एकऔर आवाज आई ,,,भाई आपके बताई स्थान के पास पहुंच चुका हूं मगर अबकैसे आऊं । मैंने कहा आप बताईये कहां हैं और कौन हैं मैं फ़ौरन वहां पहुंचता हूं। उन्होंने कहा जाईये जब आप पहचान ही नहीं रहे हैं तो फ़िर आने का क्याफ़ायदा । मैं सकपका गया , मैं आपसे बात तो कर चुका हूं पहले, और आपअपने नंबर से फ़ोन नहीं कर रहे हैं इसलिए पहचान नहीं पा रहा हूं । जाईये फ़िरमैं नहीं आऊंगा । इससे पहले कि मैं और परेशान होता ....एक ठहाका लगाऔर पता चला कि उधर से भाई पंकज मिश्रा जी ब्लोग्गर्स मीट का हालचालऔर बधाई देने के लिए फ़ोनिया रहे थे|

और अब आखिर में ताऊ डाट इन पर ताऊ का गधा संतू आपकी राय मांग रयेला है…संतू गधे को नटखट बच्चे से बचाओ!

 

हां आदरणिय ब्लागर और ब्लागरगणियों, मैं संतू गधा आपको प्रणाम करता हूं और मेरी पीडा आपको सुनाता हूं. और साथ ही ये भी उम्मीद करता हूं कि आप मुझे इस समस्या का सही निदान बतायेंगे.

 

आप यहां उपर जो चित्र देख रहे हैं इसमे एक नटखट बच्चे को मुझे सुई चुभाते हुये आप देख रहे होंगे? यह नटखट बच्चा बहुत समय से मुझे परेशान कर रहा है. यह शरीफ़ बनने का ढोंग करता है. लोगों को कहता है ये अंधा है. जबकि इसने जबरन आंखों पर पट्टी बांध रखी है, लोगो की सहानुभुति पाने के लिये.

 

सूई चुभोने के अलावा यह मेरे गधा सम्मेलन करवाने पर भी उल्टी सीधी बकबास करता रहता है. पता नही इसको गधा सम्मेलनों से चिढ क्यों है? यह जगह जगह रोता फ़िरता है कि गधे ब्लागिंग क्युं करते हैं? मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या गधे प्राणी नही होते? अरे जब मैं अंग्रेजी पढा लिखा हूं तो ब्लागिंग क्युं नही कर सकता? या बच्चे का कापी राईट है ब्लागिंग पर?

अब सर्किट भाई का आप सबकू सलाम नमस्ते….दिन भर खूब काम करने का शाम को मैं ईदरीच मिलेगा….

 

6 टिप्पणियाँ:

Suman ने कहा…

nice

10 फ़रवरी 2010 को 7:57 am
Arvind Mishra ने कहा…

कहाँ चले गए थे भैया सर्किट

10 फ़रवरी 2010 को 8:06 am
Udan Tashtari ने कहा…

मस्त चर्चा सर्किट भाई की...आनन्द आया!!

10 फ़रवरी 2010 को 8:40 am
अजय कुमार झा ने कहा…

यार सर्किट ..बोले तो अपुन को आपकी चर्चा एकदम बिंदास और इतनी झक्कास लग रेली है कि अपुन तुमको जादू की झप्पी के साथ ....प्यार की पप्पी भी फ़्री दे रेला है , और तमेरा टैंम्लेट तो ..एकदम फ़्लैट कर देने वाला वीडू, बोले तो ...........टैण टैनेन ,,,टैणेनेने
अजय कुमार झा

10 फ़रवरी 2010 को 9:52 am
संगीता पुरी ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपकी चर्चा पढने को मिली !!

10 फ़रवरी 2010 को 12:09 pm
पी.सी.गोदियाल ने कहा…

हा-हा-हा, बहुत बढ़िया !

10 फ़रवरी 2010 को 2:09 pm

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