गुरुवार, 24 दिसंबर 2009

घणी सोवणी लाग री है आज तो..: बिट्टू बावल्यो री ब्लाग चर्चा

बिट्टू बावल्यो

आप सब लोगां और लुगाईयां न बिट्टू बावल्यो री परणाम . मैं बाजार जावै हो पर म्हारी बिंदणी बोली कि अईयां कईयां बाजार जावोला? पहली मन्नै बिलाग चर्चा बांचकै फ़ेर बाजार जावो.

मैं बोल्यो अर बावली बातां क्युं करै है तू? मैं वापस आकर सुनाऊंलो..पण वा ओ बीरबानी की जात…एक बार जिद्द पकड ली सो पकड ली…अब थे बी सुण ल्यो आज की चर्चा..ऊंका पाचे मैं बाजार जाऊंलो…अरे बिंदनी सुण री है के?

अजी थे सुनावो तो सही..बिना फ़ालतू में ई सुण री है के..सुण री है के..लगा राखी है..मैं के बहरी हूं?

अच्छा बिंदनी बहरी नईं है तो ले सुण…

वो महेंद्र मिसरजी टूटे दिल की आस : हर साँस चलती है ओ जानम तेरे नाम से सुणारया हैं…

जानम कुर्बान हम तेरी प्यारी सूरत देख कर हो गए
तुमसे मोहब्बत करके जानम हम बदनाम हो गए.

अजी बिल्या का बापू ओ काईं बोलरया हो? थानै किमी सतूनो बी है कि नई?

अरे बिंदणी..या मैं नईं बोलरयो हूं..यो तो मिश्रजी बोलरया हैं..अब आगे सुण…वो पाबला जी सुणारया हैं गजरौला टाईम्स में 'पारूल चाँद पुखराज का' की खबर छपी है…और डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी बता रया हैं कि आज "450वाँ पुष्प" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") लिख दिया है….

और अब अरविंद मिसिरजी ....जैसे अदाकारा ,शायरा वैसे ब्लागरा/चिट्ठाकारा क्यों नहीं? बतारया है…तो अब मैं हो गयो ब्लागर न तू होगई ब्लागरी…

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शायरा शायरा सा कुछ! भले ही व्याकरण के लिहाज से यह गलत हो मगर एक काव्यमय सौन्दर्य तो इसमें निश्चित तौर पर है -विश्वास न हो तो मेरी टेक्नीक इस्तेमाल कर देख लें! अगर हम आगे किसी महिला ब्लॉगर का तआर्रुफ़ करते वक्त यह कहेगें कि लीजिये मिलिए मोहतरमा से.... ये हैं एक मशहूर ब्लागरा ......तो कितना अच्छा लगेगा! हैं ना ? फिर ब्लॉगर शब्द नपुंसक लिंग ही क्यों बना रहे ? आज के दौर में चारो ओर विशिष्ट से दिखने की चाह में महिला ब्लागर अगर ब्लागरा का संबोधन स्वीकार कर लें तो हर्ज ही क्या है ?

अरे बिल्या का बापू…थारी के मति मारी गई? जो मिसिरजी कह दी और थमा मान ली? अरे थम बणो ब्लागरी और हम बीरबानी तो रहेंगी ब्लागर…नै तो सब के सब ब्लागर रहो…ओ काईं बात हुई? अरे आ तो ऐसी बात हुई कि गौमाता है तो सांड जी को गौपिता बोलणो पडेगो कि नई….अब आगे सुणावो…

हां बिंदणी बात तो तू सांची केवे है…ये मिसिरजी बी दिन भर चटकारा लेता रेवे न म्हारे को तेरे से डांट खिलवा दी…तो अब तू आगे सुण…रायटोक्रेट कुमारेन्द्र पर डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर बतारया है यदि चित्र देखने की इच्छा है तो इन्हें भी देख लें….यानि अमिताभ बच्चन की पा वाली फ़ोटू दिखारया है..

अरे बिल्या का बापू..वा सनीमा तो मेरे को बी देखणा है…कद दिखावोगा?

अरे अबी तो या चर्चा सुण ले..काल से चार दिन की छुट्टी लाग री है तो आपां दोनू ही चालस्यां या सनीमा देखणे…और लगे तो शेखावत जी और आशीष जी को बी ले चालागां….सब टाब टिकरां सहित देखकए आवांला…

हां यो ठीक रहसी…अब आगे सुणावो..आगे काई है ….

अरे बिंदणी आगे कांई सुणाऊं? अहसास रिश्‍तों के बनने बिगड़ने का !!!! पर पंकज मिसिरजी के कने समीरजि रो टेलीफ़ून आगयो और वो भलो आदमी उणसे पूछ्य़ो के सर आप शरीर से जितने भारी लगते हो आपकी आवाज उतनी ही पतली क्यूं है? अब बता समीरजी बिचारा शरीफ़ आदमी कईं जवाब देता?

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नही समझे अरे भईया बादशाह है ही कितने अपने समीर लाल “समीर” जी की बात कर रहा हु …..ह तो अपने ब्लागजगत के बादशाह श्री मान समीर लाल जी का फ़ोन आया हमारे पास ….मै तो नम्बर देख कर ही समझ गया कि यह भारत मे तो कही से नही नम्बर है क्युकि यहा से लगभग सारे नम्बर का पहला दुसरा तो मालूम ही रहता है ..

और ले सुण खुशदीप सहगल भायो कईं केवे हैं…हाथी की सवारी गांठती चींटी...खुशदीप


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स्लॉग ओवर
एक हाथी स्विमिंग पूल में फिसल कर गिर गया...स्विमिंग पूल में जितनी चींटिया थी बाहर भागने लगी...लेकिन एक दिलेर चींटी हाथी के ऊपर ही चढ़ गई...उसकी सहेली ने देखा तो चिल्ला कर बोली...डुबो...डुबो साले को पानी में...स्विमिंग पूल में घुस कर लड़कियों को छेड़ता है...

अरे बिल्या का बापू..थारी तो सही मे मतिई खराब होगी…अरे वा कीडी (चींटी) भायेली सही तो केवे है..ऐसा सत्यानाशी छोरी छेडू हाथी न तो खूब कूटणो चाहिये….अब ओज्युं नी छेडेगो वो हाथी…बीरबानियां और छोरयां न…आगे सुणावो..बेगा बेगा…अब चूलो बालबा को बखत बी हो रयो है….

तो ले सुण..अब आगे की वो थारा कोटा आला वकील साहब अनवरत पर अकाल ...... शिवराम की कविता पढवारया है…और 'अदा' जी काव्य मंजूषा आली पुनर्जन्म... पर एक कविता पढवारी है…और कविता पढकर मन्नै तो यूं लागे कि मैं थारा बिंद नई होकर कूकरो बण गयो होवंतो तो आज घणा मजा मे होतो?

अरे बिल्या का बापू..थम काईं पागल हो गया के? या थारै मे कोई भूत प्रेत आगयो? मिनख से कूकरा क्यों बण रया हो?

अरे बावली बिंदणी सुण..जै या ई बात सांची है तो मैं तो मिनख बण कर घणो पछता रयो हूं…

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बिल्या का बापू ..थम तो घणा बेशर्म होगया..या गोरी का पेट पै कूकरा न क्युं चढा राख्यो है?

अरे मैं कोनी चढाराख्यो…तूं पढले..खुदई…

हनी डार्लिंग कि टेर फिर हर पल देवे सुनाई
नयन से नयन उलझ जैहें, ज्यूँ प्रेम सागर लहराई
बात बात में हम उनका गलबहियाँ भी लगाई
गोड़ हाथ के बात ही छोडो, नाक मुंह भी चटवाई

हनी डार्लिंग कि टेर फिर हर पल देवे सुनाई
नयन से नयन उलझ जैहें, ज्यूँ प्रेम सागर लहराई
बात बात में हम उनका गलबहियाँ भी लगाई
गोड़ हाथ के बात ही छोडो, नाक मुंह भी चटवाई

ओझा-उवाच पर ओझा जी बोलरया है न वित्तेन तर्पणीयो मनुष्य: ले पढ ले..

शाम को दोस्तों की मण्डली बैठी और मैंने कहा 'अबे 10 रुपये का समान 750 रुपये में ! वॉट द... '
'तुम्हारी मानसिकता अब भी वही है. इटस नोट अबाउट 750, इटस अबाउट योर मेंटालिटी. द पीपल आउट देयर कैन पे अँड दे डोंट केयर'
'आई अग्री ! शायद अभी टाइम लगे मेंटालिटी बदलने में'

और कवि योगेन्द्र मौदगिल सुणा रया हैं शब्दों से सहवास मियां .....……और आज सर्किट जी पहुंचग्या हैं चर्चा हिन्दी चिट्ठो की !!! – पर चर्चा करण वास्ते ..आज की चर्चा सर्किट भाई कर रयेले हैं! (चर्चा हिंदी चिट्ठों की)..

अरे बिल्या का बापू…यो सर्किट तो वोई है ना..मुन्ना भाई आलो? फ़ेर यो मिसिरजी के पास कईय़ां पहुचगयो? काई लाडडू..गुलाबजामुन खाबा तांई गयो के यो राममारयो? मुन्ना भाई न क्युं छोडगयो?

अरे बिंदणी..तू तो बस पूरी बात सूणै कोनी..और ले लट्ठ शुरु होगई? अरे वो तो मिसिर जि मिलगया सर्किट नै..और उणको लेपटोप लेके मोबाईल पर ही चर्चा सुणवा दी मुन्ना भाई न…जईयां मैं कदे कदे तन्नै..फ़ोन पै सुणाऊं हूं..

अच्छा या बात है के..फ़ेर तो कोई बात ना…अब थे आगे सुणावो…

ले सुणले…आज उड़न तश्तरी ... क सागै घणी माडी हो गई…अपने प्रिय, जिसने मेरी गोद में दम तोड़ा: एक श्रृद्धांजलि!!

अजी बिल्या का बापू..शुभ शुभ बोलो जि..या काईं केवो हो? कांई गमी उमी होगई के?

अरे बिंदनी पूछएई मत…उणको लेपटोप को स्वर्गवास होगयो…घणी बुरी हुई…रामजी उंकी आत्मा न शांति देवे…

मैं रात भर तुम्हें गोदी मे लिए हर संभव इलाज करता रहा. जो जहाँ से पता चला वो दवा की मगर होनी के कौन टाल सकता है. सुबह सुबह तुमने एक लम्बी सिसकी ली और मेरी गोद में ही दम तोड़ दिया. सूरज बस उगने को था.

मैं आवाक देखता रह गया. नियति के आगे भला किसका जोर चला है.

जी.के. अवधिया जी चर्चा पान की दुकान पर पर राजिम - छत्तीसगढ़ का प्रयाग का बारां म बतारया है…राजतन्त्र पर पढ सकै है..रास्ते में मौत का सामान….

और आज रामप्यारी की पहेली फ़र्रुखाबादी विजेता (152) : संगीता पुरी जी जीत गई है…

और जबलपुर-ब्रिगेड पर बिल्लोरे जी सम्मानित होंगे श्री महेंद्र मिश्र ,श्री सनत जैन भोपाल ,श्री गोकुल शर्मा दैनिक भास्कर जबलपुर … और अब आखिर म लिलले म्हारी लाडली लविज़ा | Laviza से…मम्मा….. आफिछ …. आफिछ…. ?? आज कल घणी समझदार होगी है लविजा…

lavija

पहले जब मम्मा या पापा ऑफिस जाते थे तो मैं भी उनके साथ जाने की जिद करती थी. पर अब मैं समझदार हो गयी हूँ. मुझे पता है की ऑफिस तो जाना पड़ता है ना…

इसलिए अब जब मम्मा ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रही होती हैं तो मैं रोज़ ऐसे पूछती हूँ, ” मम्मा… ओफिछ…. ओफिछ…. ?

फिर जब मम्मा हाँ में जवाब देती हैं, तो मैं फिर से अपने खेल में बिजी हो जाती हूँ.

क्यूँ है ना समझदारी वाली बात

हां जी आजकल तो लविजा घणीई समझदारी री बातां क्ररे है…सुणॊ जरा लवि कि मम्मी न फ़ोन कर दियो के आज लवि की नजर उतार देसी…घणी सोवणी लाग री है आज तो..

हां मैं फ़ोन कर द्य़ू ला…थूं चिंता मत कर….

तो बहणों और भाईयो अब बिट्टू बावल्या और ऊंकी बिंदणी न इजाजत द्य़ो…आगला सप्ताह म फ़ेर आवांगा..आपरे वास्ते एक नई चर्चा लेकर…..

आपरो बिट्टू बावल्यो

6 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी ने कहा…

आज तो ब्लाग चर्चा घणी सोवणी लाग री है !!

24 दिसंबर 2009 को 5:32 pm
बी एस पाबला ने कहा…

घणी सोवणी ब्लाग चर्चा लागी मणे

बी एस पाबला

24 दिसंबर 2009 को 5:56 pm
ललित शर्मा ने कहा…

चालो रै भाई म्हे बी बावळा के सागे कदे हो ज्यां बावळा जी
सारे गाम मे हेल्लो कर फ़ेर ढुढतो रहवै म्हाने पावळा जी

राम-रा्म बावळा जी

24 दिसंबर 2009 को 6:07 pm
Arvind Mishra ने कहा…

बिट्टू बावल्यो तो कहर डःआ गए -बावली बूच हुए हम !

24 दिसंबर 2009 को 7:10 pm
Udan Tashtari ने कहा…

बिट्टू बावल्यो तो मस्त रंग जमा देते हैं..लगे रहो बिट्टू.. :)

24 दिसंबर 2009 को 11:23 pm
'अदा' ने कहा…

मुन्ना भाई...तुस्सी ग्रेट हो जी...
चका-चक चर्चा चलाई है...
हमने भी यहाँ आपकी कृपा से झलक दिखाई है...

26 दिसंबर 2009 को 2:15 am

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