बुधवार, 2 दिसंबर 2009

वो मुन्नी भाभी कू मिलने वास्ते इदर आयेला था पण…

अरे सर्किट..तू कहां चला गयेला था रे?

अरे भाई ..अपुन आपको बतायेला था ना..वो मुन्नी भाभी कू मिलने वास्ते इदर आयेला था पण…भाभी से अपुन का मुलाकात बी नही हुयेला..कारण कि वो खुशदीप भाई ने भौत कोशीश कियेला था बप..पण मिलने का मंजूरिईच ई नईं मिला..

अबे सर्किट तो उदर क्या कर रियेला था..इदर कू आया काहे कू नई?

अरे भाई मैं इदर आरयेला था पण फ़िर मेरे कूं मालूम पडा कि अजय झा जी…टंकी पर चढ गयेले हैं तो उदर को बी जाने को मंगता ना? तो भाई मैं कल उनको फ़ोन मार रयेला हूं..मेरी बात नई हो रयेली है..जैसेईच उनसे मुलाकात होंगी..मैं फ़टाफ़ट चला आयेगा ना भाई..

अरे तो सर्किट…तू मेरे को ब्लाग चर्चा…फ़ोन पे ई सुना डाल? क्या..?

हां भाई..लो आप तो अबी फ़ोन पेईच सुनने का…

 

भाई मुकेश कुमार जी तिवारी की  अपनी सौंवी पोस्ट पर  कविता छापेली है.

अरे सर्किट..तो तिवारी जी को बधाई दे डालने का ना?

अरे भाई  आप काहे कू टेंशन लेने का..देदिया ना मैने भाई की तरफ़ से बधाई..हां तो ख्शदीप भाई मेरे कू बता रयेले थे कि जीते जी कंगाल, मर कर मालामाल...खुशदीप हो गयेले थे माईकल जेक्शन…और दिगंबर नासवा जी बोल रयेले हैं न्याय की आशा यहाँ परिहास है  …और भार्तीय नागरिक बोल रयेले हैं इस कुर्बानी की परम्परा को क्यों नहीं रोका जाता…   रंजना [रंजू भाटिया]  लिख रयेली हैं..    तूने आज जब वो मेरे लिखे ख़त जलाए होंगे.. और बबली जी at GULDASTE - E – SHAYARI पर शायरी लिखेली हैं.

 

और भाई रामप्यारी ने फ़र्रुखाबादी विजेता (128) : उडनतश्तरी को बना दियेला है…पता नई किदर से तो बी एक घोदा और एक गधेडे को खडा करके फ़ोटो खींच लियेला है और सबको पका रयेली है…और भाई एक भौत अच्छी बात ये हुयेली है कि अपने पी.सी.गोदियाल जी को ज्ञान प्राप्त होगयेला है और वो बोल रयेले हैं कि ये दुनियां चलायमान है मूरख!

जरा संभलकर चलने का भाई.

 

और गगन शर्मा जी पूछ रयेले हैं आयोडीन नमक जरूरी है क्या ? …  संगीता जी पूछ रयेली हैं कि    ज्‍योतिष का सहारा लेकर क्या भवितब्यता टाली भी जा सकती है ?? (दसवीं और अंतिम कडी)….तो इधर संजय तिवारी जी बोल रयेले हैं कि मोह्ब्बत को मजबूरी का नाम मत देना ।…वो तो अपुन भाई लोग देताईच नई है ना….और भाई ये महफ़ूज भाई को समझाने का जरा…गाली गलौच कर रयेले हैं…अबे! साले, हंस क्यूँ रहा है?..

 

ए सर्किट..जरा फ़ोन लगा..महफ़ूज भाई..ऐसा नईं करने का..गाली बिल्कुल नही देने का…अपुन साला मर गयेला है क्या जो महफ़ूज भाई गाली देंगा?

अरे भाई आप टेंशन नई लेने का..मैं फ़ोन करके उनको बता दियेला हूं ना भाई…

 

और वत्स जी     नारी मुक्ति का ये प्रपन्च.."सशक्तिकरण के नाम पर कुछ कुछ इधर की, कुछ उधर की कर रयेले हैं…और भाई खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (129) रामप्यारी लेके रामप्यारी फ़िर पकाने आगयेली है…  और शाश्त्री जी "वीराना जैसा अपना चमन हो नही सकता" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")  ऐसा बोल रयेले हैं…और पाबलाजी नवम्बर माह में छूट गए इन साथियों को बधाई दे रयेले हैं….और अशोक पांडे जी जीएम बैगन व चावल ही क्‍यों, अब तैयार रहिए खाने को कृत्रिम मांस  खाने के लिये तैयार कर रयेले हैं सबकूं…और विवेक रस्तोगी जी मुंबई के ब्लॉगर बंधु ध्यान दें – ब्लॉग मीटिंग के लिये आज मेरी बात अविनाश वाचस्पति जी से हुई … बता रयेले हैं…

 

अरे सर्किट पण ये अविनाशजी दिल्ली मे हैं तो इदर क्या कर रयेले हैं?..

भाई मैं जैसे दिल्ली आयेला हूं वैसेईच वो मुम्बई आयेले हैं..आप टेंशन नई लेने का…..और भाई मीनू खरे जी लव स्टोरी 2009 में भौत बढिया बात बता रयेलि हैं..सुननए का जरा..वो कह रयेली हैं….

 


My Photo

पोजिटिव - पोजिटिव शादी को एचआईवी का प्रसार रोकने का एक महत्वपूर्ण उपाय मानने वाले इस दंपत्ति ने एक मैरिज ब्यूरो भी खोला है जहाँ एचआईवी पोजिटिव लोगों की शादी के साथ यह भी सिखाते है की एचआईवी पोजिटिव होने के बाद भी कैसे सामान्य जैसा ही जीवन जिया जा सकता है.

 

अरे सर्किट मीनूजी को भौत धन्यवाद देने का इस स्टोरी के लिये..

अरे भाई आप काहे कू टेंशन ले रयेले हैं..मैं देदेगा ना उनको बधाई..अबी की अबी देदेता हूं…और भाई अदाजी मंदिर की जिन्हें पहचान नहीं वो रंग महल कह देते है..गजल लिखेली हैं और भाई उनकी ही आवाज मे …बेकरार दिल तू गाये जा खुशियों से भरे वो तराने…गाना भी गायेली हैं….सुनने का भाई…

 

और राजकुमार ग्वालानी जी बोल रयेले  हैं बिग-बी असली पा की कुछ तो मदद कर दीजिए…. योगेन्द्र मौदगिल जी   कवि योगेन्द्र मौदगिल पर घनाक्षरी पढवा रयेले हैं…और वकील साहब मुगल कालीन सर्वोच्च और प्रांतीय न्यायालय : भारत में विधि का इतिहास-8 ..बता रयेले हैं तीसरा खंबा पर….और ताऊ लठ्ठ्वाले ताऊ की चौपाल मे : दिमागी कसरत – 3 करवा रयेले हैं..आजकल उनको और कोई काम नई दिख रयेला है…

 

और ललैत शर्माजी को ठंड लग रयेली है भाई ..इसीलिये वो मुझे जरुरत है तुम्हारे स्नेह मंत्र से अभिमंत्रित स्वेटर की !!!!!  स्वेटर मांग रयेले हैं…और सीमा गुप्ताजी ने " मन की ओस की गर्म बुँदे " ये कविता पढवा रयेली हैं..शेखावत जी कैसे बचे ईमानदारी ? के फ़ार्मुले बता रयेले हैं.

 

औरवाणी गीत मेरी बात ...खालिस गृहिणी वाली बता रयेली हैं…और खुशदीप भाई 'माधुरी दीक्षित' में इंदिरा गांधी का तिलिस्म...खुशदीप  ढूंढ रयेले हैं…और कोचीन वाले शाश्त्री जी एक झूठ जिसे हर कोई सच मानता है!!  बता रयेले हैं…और आनंद पाठक बोल रयेले हैं एक व्यंग्य : तितलियाँ ज़िंदा हैं.......... गोदियाल जी घुन लगी न्याय व्यवस्था और न्यायिक आयोगों का औचित्य ! बता रयेले हैं….और आशीष खंडेलवाल जी विजेट्स की परेशानियां : काम जारी है..  ये बोल रयेले हैं…और वत्स जी  आपके सवाल--क्या जन्मकुंडली देखकर बताया जा सकता है कि ये जन्मकुंडली स्त्री/पुरूष/पशु/पक्षी आदि किस की है ?  ये बता रयेले  हैं…

 

अरे सर्किट ..पण अबकी बार…ताऊ की पहेली को कौन जीत गयेला रे? क्या अपुन जीत गयेला क्या रे?

 

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अरे नईं भाई..वो विवेक रस्तोगी भांजी मार दियेला है अबकी बार….आप टेंशन नईं लेने का भाई..अपुन देख लेगा उसको तो भाई…

और सर्किट वो उडनतश्तरी नईं दिख रयेली अबी तक?

वो दिखी ना भाई..वो देखो…आगयेली है…विल्स पीते हुये..मैने क्या खास किया!!!-विल्स कार्ड भाग ७

 

मेरा फोटो

रिश्तों पर जमीं गर्द को
खुरच कर नहीं उधाड़ा करते..
खुरचने से जख्म छूट जाता है

और बस

एक आहत रिश्ता
सामने आ जाता है..

उन्हें आँसूओं की नमी से
भीगो कर
फुलाओ
और फिर
स्नेह रुपी मलमल से
साफ कर उबारो...

जो बिगड़ा था उसे भूल
सिर्फ भविष्य को सुधारो.

अच्छा भाई आप अबी आराम करने का..अपुन अबी झा जी से मिलने जा रयेला है..फ़िर खुशदीप भाई ट्राई मार रयेला है..मुन्नी भाभी से मुलाकात का टेम लेने वास्ते…मैं सब समाचारों के साथ शाम को फ़ोन मारता है आपकू….

 

 

 

14 टिप्पणियाँ:

रंजन ने कहा…

मजाक मजाक में मस्त मजाक हो गई है.. लगे रहो..

2 दिसंबर 2009 को 2:34 pm
संगीता पुरी ने कहा…

सचमुच कई दिन बाद दिखें .. भाई का ख्‍याल रखा करें !!

2 दिसंबर 2009 को 3:38 pm
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

वाह्! एकदम बढिया चर्चा....
कईं दिनों बाद दिखाई दिए.....भाई के लिए अभी कोई लडकी फाईनल हुई कि नहीं ?
शादी का मुहूर्त निकला जा रहा है :)

2 दिसंबर 2009 को 5:32 pm
हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बहुत दिनों बाद दिखे भाई !

बहुत से लिंक शामिल हैं । आभार ।

2 दिसंबर 2009 को 6:01 pm
'अदा' ने कहा…

अजी !! कहने को तो हम केतना कुछ कह सकते है...लेकिन का कहें....काहे की हम कुछो कहेंगे तो लोग कहेंगे की हम कह रहे हैं.....का करें ? लेकिन हम नही कहेंगे तो कौन कहेंगा ... कहिये तो....तो कहना तो पड़ेगा.... इ कह रहे हैं कि कौनो कहने लायक नहीं है....काहे कि हम कुछो भी कहेंगे उ तो कमे न हो जाएगा......इसीलिए यही कहते हैं आप 'कमाल' हैं... !!!! कैसन कहे ...कहिये तो ???

2 दिसंबर 2009 को 7:46 pm
Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बढ़िया और मस्त चर्चा :)

2 दिसंबर 2009 को 8:06 pm
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत झकास चर्चा भाई. लगे रहिये.

रामराम.

2 दिसंबर 2009 को 9:05 pm
खुशदीप सहगल ने कहा…

ए सर्किट, सब रपचिक तो अदा जी बोल डाला...अब क्या बोले रे बाप...मुन्नी मेंटेन के एप्लीकेशन लगाई देला है...कुछ जादती ही भाव खारेली बंकस...फिलहाल अपना दिमाग अजय भाई को टंकी से उतारने पे लगेला है...मुन्ना भाई से बोलने का सब्र के साथ पेशेंस दिखाने का...

जय हिंद...

3 दिसंबर 2009 को 12:34 am
Suman ने कहा…

nice

3 दिसंबर 2009 को 6:55 am
राजकुमार ग्वालानी ने कहा…

झकास चर्चा किएला है

3 दिसंबर 2009 को 8:27 am
Shastri JC Philip ने कहा…

वाह वाह ! चर्चा ने तो समां बांध दिया है!!

सस्नेह -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
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3 दिसंबर 2009 को 9:06 am
निर्मला कपिला ने कहा…

वाह बहुत मज़ेदार चर्चा है शुभकामनायें

3 दिसंबर 2009 को 9:57 am
ललित शर्मा ने कहा…

ऐ सर्किट चर्चा तो झकास है पण बीड़ु हमारे नाम मे गड़ बड़ है, तुमने अपुन को भी लठैत (ललैत) बना दि्या भाऊ, लगे रहो।

3 दिसंबर 2009 को 10:26 am
Ashok Pandey ने कहा…

मस्‍त चर्चा है। आपके अलग अंदाज ने चिट्ठों की चर्चा को बहुत जायकेदार बना दिया है।

3 दिसंबर 2009 को 2:55 pm

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