बुधवार, 18 नवंबर 2009

ब्लाग चर्चा : तू कबी आयेला? और किदर कू गयेला था?

अरे सर्किट ओ सर्किट..

क्या है भाई?

अरे तू कबी आयेला? और किदर कू गयेला था?

भाई मैं अबीच आयेला है ना..वो मकान खाली करवाने के वास्ते गया था ना भाई.

अरे तेरा वो ब्लाग चर्चा सुनाने का है कि नही तेरे..

अरे भाई काहे कू चिंता करने का… आप तो मस्त चर्चा सुनो ना भाई..

 

Apples-

 

भाई  वो राजकुमार ग्वालानी जी बोल रयेले हैं कि खेलगढ़ पांच सैकड़ा पार, राजतंत्र तिहरे शतक के करीब  हो गयेला है भाई….

 

अरे सर्किट तो बधाई दे डाल ना…

हां देदी ना भाई…आपतो आगे सुनो… काजल कुमार जी एक मस्त कार्टून बनायेले हैं ना भाई कार्टून :- हा हा हा इस गांव में बिजली भी आती है  

 

अरे सर्किट ….कित्ती झूंठ बात है ना सर्किट? बिजली किदर कू आती है?

 

हां वो तो सहीच बात है ना भाई… और भाई दिगम्बर नासवा जी बता रयेले हैं कि  देश का बदला हुवा वातावरण है  जरा संभलकर रहने का भाई.  

 

अरे सर्किट  क्या फ़िर से ??  फ़िर ऐसे खराब माहौल मे  चार महीने तक ताजा बना रहेगा यह सेव ..ऐसा मुश्किलच दिखता है रे?

 

हां भाई आप तो हमेशा सचिच बोलते ना भाई…इसीलिये अबकी बार ताऊ पहेली - 48 : विजेता श्री दिलीप कवठेकर बन गये ना भाई…..और भाई इसके बाद अल्पना वर्मा जी 'कश्ती का खामोश सफर है '  करवा रही हैं.  और भाई फ़िर से फ़र्रुखाबादी विजेता (114) : उडनतश्तरी बन गयेले हैं. और भाई इसका पिच्छू अपने शाश्त्री अन्ना 100 रुपये में मुफ्त खाना?? खाने के तरीके बता रयेले हैं…

 

अरे सर्किट तेरे कू एक लाफ़ा मारुंगा ना?  अरे सौ रुपये देने का है तो मुफ़्त खाना कैसे?

हां भाई ये आप सहीच बोलते ना..मैं अबी अन्ना को फ़ोन लगाके आपकी बात करवाता ना भाई..आप टेंशन नही लेने का भाई… वो संगीता जी मंगल ग्रह की वर्तमान स्थिति के कारण विभिन्‍न लग्‍नवाले भिन्‍न भिन्‍न संदर्भों को लेकर प्रभावित होंगे !! बता रयेली हैं.और भाई वो भारतिय नागरिक बोझा और टेकनोलोजी का संगम बता रयेले हैं. फ़िर अपने दरबार साहब लिनक्स iso इमेज की सी.डी बनाना  सिखा रयेले हैं. फ़िर गोदियाल जी घरवालो को इन्फ्लेशन की मीनिंग समझाने का नायब तरीका ! बता रयेले हैं.

 

अरे सर्किट अब तू ये सब बताता सिखाताईच रहेगा कि तू मेरे कू बतायेगा कि  कौन था वह? लार्ड कर्जन को मारना चाहता था या बचाना ?

 

बताता ना भाई अबी का अबी बताता ..टेंशन नही लेने का भाई… पहले वो अपने शाश्त्री जी बता रयेले कि "देश का दूषित हुआ वातावरण" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक") हो गयेला है भाई और इसकी वजह से शेफ़ाली पांडे जी बोल रयेली है कि आजकल ज़रा बीमार हूँ

 

अरे ये सर्किट…उनको बोल ना जरा दवाई ठीक से लेने का और टेंशन नही लेने का…और बोले तो जल्दी ठीक होने का और जल्दी पोस्ट लिखने का..मुन्ना भाई को उनके व्यंग भौतईच अच्छे लगते  ना.

 

हां बोल दिया ना भाई.. आपको तो 'अदा' की आवाज़ में....चन्दा ओ चन्दा, चन्दा ओ चन्दा.....   मस्त सुनने का भाई….मजा आजायेगा.   और भाई आज सबसे आखिर मे टिप्पु चच्चा  बता रयेले कि  कैसे  सांड तो लड अलग भये .: .चाईनीज चर्चा….

 

अरे ढक्कन…मेरा मतलब सर्किट…तू मेरेकोईच मामू बना रयेला क्या? 

नही हाई..अपुन आपको क्यों मामू बनायेगा? नही कसम से भाई..

अरे तो फ़िर ये टिप्पू चच्चा कौन आगयेले हैं? पिच्छू  कबी नाम तो नही सुनेला था? कौन हैं ये?

भाई आप टेंशन नही लेने का भाई…अपुन को क्या लेने का?  चच्चा कौन है? कोई नही जानता भाई……..पण एक बात बोलेगा भाई..कसम से चच्चा टिप्पणी चर्चा बडी मस्त करता है भाई….अपुन को आम खाने का ना भाई..अपुन को क्या करने का ये जानकर कि कौन कौन है भाई..

 

हां रे सर्किट ये बात तो तू भौ सही बोल रयेला है बाप….पण   आज वो उडनतश्तरी नही दिखी  रे सर्किट……

अरे भाई टेंशन नही लेने का भाई..बस सुबह शाम मे आती ही होगी उडनतश्तरी….आप टेण्शन नही लेने का भाई……आप तो खाना खाओ ना भाई

 

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अरे वाह सर्किट..क्या मस्त थाली है? किदर से बुलवाई है ये?  इसकू देख के ही भूख लग गई बाप….ला जल्दी दे…..

भाई ये रामप्यारी एंड डा.  झटका रेस्टोरेंट से बुलवाई है ना भाई…आप तो मस्त चकाचक खाने का भाई…टेंशन नही लेने का भाई……..

 

(क्रमश:)

11 टिप्पणियाँ:

अजय कुमार झा ने कहा…

मुन्ना भाई आज तो पहली बार आया अपुन ...कसम से क्या रापचिक चर्चा कियेला है बाप ..बोले तो एकदम कडक और झक्कास ...चर्चा मंच के तेवर और अंदाज बदल रहें हैं ....नए नए फ़्लेवर में मजा जादा आ रेला है रे.....आईला रे चर्चा मस्त मस्त आएला रे..

18 नवंबर 2009 को 10:25 pm
रंजन ने कहा…

मुझे तो भूख लग रही है...

18 नवंबर 2009 को 10:31 pm
Udan Tashtari ने कहा…

आ गई सर्किट उड़नतश्तरी भी...भईये, दफ्तर भी तो जाना पड़ता है कभी कभी. :)

मस्त चर्चा कर डाली, बधाई. चालू रहो!!

18 नवंबर 2009 को 10:39 pm
संगीता पुरी ने कहा…

वाह .. क्‍या बात है !!

18 नवंबर 2009 को 10:43 pm
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

वाह सर्किट भाई ...आपने तो झण्डे गाड दिये बाप. मस्त चर्चा कियेला है, भाई तो आते ही चा गयेला है.

रामराम.

18 नवंबर 2009 को 10:57 pm
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

भूल सुधार

चा = छा

पढा जाये.

रामराम.

18 नवंबर 2009 को 10:58 pm
'अदा' ने कहा…

सोलिड चर्चा है बाप..बोले तो एकदम मस्त... मैं तेरे को बोलती है...ऐसेइच लगे रहने का ...क्या...कोई राड़ा नै करने का....बस...चूप-चाप चर्चा करने का...और मस्त रहने का....फिर अक्खा दुनिया बोले तो तुम्हारा जेब में होइंगा....क्या..!!

18 नवंबर 2009 को 11:10 pm
Anil Pusadkar ने कहा…

क्या चर्चा कियेला बीड़ू?बोले तो एकदम झक्क्काआआआआआआआआस्।

19 नवंबर 2009 को 1:09 am
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

वाह्! लाजवाब चर्चा.....

19 नवंबर 2009 को 12:17 pm
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…

छा गए बाप अब कोई इग्नोर करे भी तो कैसे सर्किट
भाई.....इग्नोर कोई नहीं करता सब के पेट में दांत होते है
एकदम झक्कास बाउंड्री मारा रे बाप

19 नवंबर 2009 को 6:23 pm
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

गजब का सर्किटनामा

20 नवंबर 2009 को 8:09 pm

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