शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

गजब हो गयेला भाई..भौत बुरा होयेला है भाई

अरे सर्किट तू किदर कू है रे?

भाई मैं इदरिच है ना..भाई..काहे कू टेंशन ले रयेला है?

अरे सर्किट टेंशन गयेला तेल लेने कू…क्या समझा? अरे ब्लागजगत में आजकल जिदर देख रयेला है अक्खा तरफ़ तरफ़ पहेली चल रयेला है..बस अपुन को जीतने का तो जीतने का….…पण अपने कू कुछ आता जाताईच नई?

भाई काहे को टेंशन लेने का…मैं है ना..टेंशन नई लेने का…आप जीतेंगा ना भाई..कलिच शनिवार को तो ताऊ का पहेली होता ना भाई..बस कल आप जीत रयेले हो भाई…

अरे सर्किट क्या घंटा जीत रयेला हूं..अपुन को आता जाता कुच्छ बी नईं और जीत रये ले हो भाई? सर्किट जा और जाकर अक्खा ताऊ को ऊठा ला…सुबह जवाब दिलवा कर छोड देने का उसको…

अरे भाई आप भी खामखाह परेशान होते ना? अरे ताऊ तो खुद बावलीबूच है भाई…आता जाता कु्च्छ बी नईं..सिर्फ़ हाफ़ हुफ़ करता भाई…..भाई अगर ऊठवाने का ही बोले तो उडनतश्तरी को ऊठवा लेते भाई…कसम से सारी पहेली अकेलाईच गप कर डालता है भाई…जवाब दिलवा कर छोड देने का…

एइसा क्या? तो जल्दी बीस मिनट मे जाने का और दस मिनट में लौट के आने का…

हऊ ना भाई..मैं कल जाकर उडनतश्तरी को आजईच ऊठवा लेगा ना भाई..अबी आप तो सर्किट-वाणी का पाठ सुनलो ना भाई….

sameerji-drink

भाई तन्हाई मे अजयकुमार गठरी बांध के चल दियेला है भाई….और गोदियालजी बोल रयेले हैं की अगर आने का है तो कभी मेरे शहर आना ! …इसका पिच्छू पा रहे है क्यों सजा ? ये क्षत्रिय पूछ रयेले हैं.

और भाई अरविंद मिश्रा जी बोल रयेले हैं कि इंतज़ार की घड़ियाँ खत्म हुईं -आज की नायिका है विरहोत्कंठिता……

अरे सरकिट..ये सुनके तो अपुन कू तेरी भाभी की याद आ रयेली है बाप….

भाई अबी भाभी कू याद नईं करने का…अबी उसका समय नईं आयेला है है भाई….और भाई आपको अंताक्षरी खेलने का तो राज भाटिया जी बुलायेले हैं..आओ आप को ले चले बीते दिनो मै...अन्ताक्षरी ..जाने का मन करे तो जाने का…और भाई फ़िर “अदाजी” का गायेला गीत इतना तो याद है मुझे के उनसे मुलाक़ात हुई सुनने का ..और टोर्च , घड़ी , कैलेंडर की तरह ही उपयोगी है गत्‍यात्‍मक ज्योतिष !! में सीधे संगीता जी से भविष्य दिखवाने का की भाभी कब तक आ रयेली है…..यानि भाई की शादी के सितारे कबी आयेंगे?

और भाई उसका पिच्छू रामप्यारी की पहेली फ़र्रुखाबादी विजेता (117) : M VERMA जीत गयेले हैं…..उधर अल्बेला खत्री साधना सरगम के सुरीले कंठ से हास्यकवि अलबेला खत्री की करगिल शहीदों को भावपूर्ण शब्दांजलि दे रयेले हैं. उधर रंजू भाटिया जी एक घटना .... बता रयेली है. भाई रामप्यारी फ़िर एक सवाल ऊठायेली थी खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (118) : रामप्यारी जिसका सही जवाब देदियेले हैं मुरारी पारीक.

अरे सर्किट आगे बी चल ना रे….

हां चलता ना भाई..आप टेंशन नईं लेने का भाई…..हमारे समय के अग्रणी रचनाकार : गजानन माधव मुक्तिबोध (1) से वकील साहब मिलवा रयेले हैं…अरविंद मिश्रा जी नायिका से मिलवाने का पिच्छू अबी ट्रेन में बैठा रयेले हैं.. ......आखिर कैसे छूटी ट्रेन और फिर शुरू हुआ 'कैटिल क्लास' का सफ़र ! (यात्रा वृत्तांत -२)….और भाई अमेरिकी अभिमन्यु और अफ़गान चक्रव्यूह के बारे मे कविता वाचक्नवी बता रयेली हैं "हिन्दी भारत" पर…

अरे सर्किट आज कल अजयकुमार झा जी नही दिखरेले हैं?

अरे भाई आपने याद किया और ये आगयेले हैं झाजी…अबी तक ये ब्लागर मीट करवा रयेले थे उसी मे व्यस्त हो गयेले थे….ब्लोग्गिंग में कमाई के लिये खुद को तैयार कर रहे हैं न .....नहीं तो ..करिये न...? कमाई के तरीके बता रयेले हैं.

अरे सर्किट पढकर सुना तो क्या कह रयेले हैं..अगर ब्लागिंग से कमाई हो जाये तो अपुन लोग बी शरीफ़ बन जायेंगे ना ?

हां भाई अपुन तो अब बी दुसरों से ज्यादाईच शरीफ़ हैं ना भाई….

हां भाई इसलिये प्रवीण जाखड घोटालों का राज ! बता रयेले हैं…भाई….और भाई विवेक रस्तोगी सूर्यपुत्र महारथी दानवीर कर्ण की अद्भुत जीवन गाथा “मृत्युंजय” शिवाजी सावन्त का कालजयी उपन्यास से कुछ अंश – २९ [गुरु द्रोण की परीक्षा और पक्षी की आँख..] की कथा कर रयेले हैं भाई आजकल…..और अनिल पूसदकर जी बेटा गनिमत समझो हम लोग हैं,वर्ना यंहा पर हम नही तुम बैठे होते गरम पंचर बनाते हुये वाला किस्सा बताने पर तुल रयेले हैं भाई…

हां सुनाने का ..उनको बोलो भाई सब सुन रयेले हैं….

और भाई अब भौत दुख भरी खबर दे रयेले हैं खुशदीप….गजब हो गयेला भाई..भौत बुरा होयेला है भाई.

अरे सर्किट कुछ बोलेंगा भी या खाली पीली…खट राग गाता रहेंगा?

अरे भाई अब क्या बोलेगा? मक्खन की बेबे (मां) गुम हो गई...खुशदीप भाई भौत बुरा हुआ…और भाई पांडे जी अरहर की दाल और नीलगाय के बता रयेले हैं भाई..शायद अरहर की दाल इसीलिये महंगी होगयेली है….

क्षत्रिय पर नीला गगन हो मस्त साथी सुना रयेले हैं…वडनेरकर जी शहर का सपना और शहर में खेत रहना [आश्रय-23 बता रयेले हैं भाई….और तीसरा खंबा पर आस्ट्रेलिया में भारतीय पर हमलावरों को सजा का समाचार - अच्छा, लेकिन अवसाद प्रदायक..वाला समाचार लिखेला है भाई…

"इंदिरा गांधी के फैसलों में होती थी हिम्मत" (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की) ये चर्चा शाश्त्रीजी ने करेली है भाई….और ग्वालानी झी बता रयेले हैं कि कोहरे से घिरी राजधानी ,,,अबी और क्या होयेंगा भाई…बिन गुरु ज्ञान कहाँ से लाऊं? ये प्रवीण मास्साब बोल रयेले हैं भाई…. और भाई रोते को हंसा दो तो कोई बात है साहिब, हंसते को रुला देना बड़ी बात नहीं है ,ये गजल सुना रयेले हैं रविकांत पाण्डेय जी….

पाबलाजी आज डॉ आर सी मिश्र का जन्मदिन है बता रयेले हैं…

अरे सर्किट..मिश्राजी को अपुन की तरफ़ से हैप्पी बड्डॆ बोलने का..

हां बोल दिया ना भाई….अब रस्तोगी जी थोड़ी देर के लिये टेन्शन भगायें… [Tension Relievers.....] हँसे और हँसायें…. बता रयेले हैं…..

और भाई गजब हो गयेला है…भौत गजब हो गया भाई..उडनतश्तरी…बोल रयेली है कोई मेरी मजबूरी भी तो समझो!! पण कोई सुनने कोईच तैयार नही है भाई…और भाई सतीश सक्सेना जी देश को धन्यवाद दे रयेले हैं…. धन्य है वह देश जिसने इस परिवार को जन्म दिया ! और हिमांशुजी करुणावतार बुद्ध –3 के बारे मे बता रयेले हैं भाई…और इर्द गिर्द पर ....सुनो सुनो गन्ने का गम सुना रयेले हैं….

और भाई अब अदाजी एक और गीत सुना रयेली हैं…'अदा' गाये.... तुम्हीं मेरे मन्दिर.....हे मैंने क़सम ली... और भाई गोदियाल जी सब ओंछा ही ओंछा ! बता रयेले हैं….

भाई अबी अपुन जाता है..आपका कल पहेली जीतने का प्रबंध करने कू….

हां सर्किट जा और पक्का काम डाल के लौटने का……

18 टिप्पणियाँ:

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

really nice bhai log...

20 नवंबर 2009 को 5:26 pm
Nirmla Kapila ने कहा…

रोचक चर्चा है बधाई

20 नवंबर 2009 को 6:20 pm
अजय कुमार ने कहा…

मस्त चर्चा करेला है भाई,

20 नवंबर 2009 को 6:39 pm
'अदा' ने कहा…

ऐ सर्किट...क्या...तेरे को अपुन चिंदी चोर लगता है क्या....समीर भाई का पोस्टर और अपुन का पासपोर्ट साइज़ का भी वान्दा पडेला है... नई बोल न.....कोई मिस्टिक बोला तो बोल न !! ...ऐसा काय कू....???
लेकिन एक बात का क्रेडिट देंगा अपुन ....चर्चा मस्त लिखेली है......चल जा माफ़ किया.......क्या !
@सॉरी समीर भाई.....आपसे अपुन का कोई टंटा नई है.....अपुन तो ऐसईच सर्किट का क्लास लेता था.....माफ़ करना बॉस..!!

20 नवंबर 2009 को 6:43 pm
Udan Tashtari ने कहा…

सटीक चर्चा..वाह भई सर्किट...आये नहीं उठाने उड़नतश्तरी को. :) क्रेन लेकर आना!!

20 नवंबर 2009 को 6:46 pm
संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर चर्चा .. पर भाई के लिए भविष्‍य देखने का नहीं बनाने का .. आज ही कहीं से दुल्‍हन उठाकर ले आने का !!

20 नवंबर 2009 को 7:00 pm
Suman ने कहा…

nice

20 नवंबर 2009 को 7:00 pm
पी.सी.गोदियाल ने कहा…

एक और मजेदार चर्चा !

20 नवंबर 2009 को 7:12 pm
तोसे लागे नैना ने कहा…

वाह अच्छी चर्चा है...

20 नवंबर 2009 को 7:13 pm
'अदा' ने कहा…

सर्किट भाई,
आपका चर्चा करने का यह अंदाज़ मुझे बहुत पसंद है...
दरअसल मुझे ये बम्बैया अंदाज़ इतना पसंद है की आज से लगभग ४ महीने पहले मैंने इसी अंदाज़ में एक कविता भी लिख डाली थी..
और इसी लिए महिला होकर भी आपको इस अंदाज़ में जवाब दे देती हूँ...लोगों को अजीब लगता भी होगा....
लेकिन अब ये मुझे पसंद ही है क्या करूँ....शायद मैं पिछले जनम में कोई 'भाई' ही रही हूँ...कौन जाने...हा हा हा
आप अन्यथा मत लीजियेगा....
मेरी कविता का लिंक दे रही हूँ कभी पढियेगा....

http://swapnamanjusha.blogspot.com/2009/08/blog-post_11.html

20 नवंबर 2009 को 7:40 pm
हिमांशु । Himanshu ने कहा…

काश यह बम्बईया अंदाज मुझे भी आता तो यहाँ टिप्पणी का आनंद मिलता - खैर आप तो हमारी इसी खालिस हमारे अंदाज वाली टिप्पणी से काम चलाओ -

सुन्दर चर्चा । आभार ।

20 नवंबर 2009 को 10:27 pm
अजय कुमार झा ने कहा…

अबे संकटेश्वर ..क्या बोल रेला है बे ..झा जी नहीं दिख रेले हैं ..अबे अपुन तो रोजिच तेरी चर्चा में एक टीप का खर्चा कर के जाता है फ़िर कायकू ऐसा बोला तेरी चर्चा तो एक दम टैण टैणेन चल रेली है बाप बोले तो ....सबकी वाट लगा डाली मामू

20 नवंबर 2009 को 11:01 pm
जबलपुर-ब्रिगेड ने कहा…

ओय मुन्ना भाई इधर अपुन तुमारा एड करेला तुम देखा नई सर्किट समझा भाई को
टॉप पे पोस्ट चली झक्कास तुम देखैच्च नइं..... अरे अपुन साफ़ समझा देता है भाई
इग्नोर नाम का पायज़न चढ़ गयेला क्या..?

20 नवंबर 2009 को 11:45 pm
जबलपुर-ब्रिगेड ने कहा…

मामू चर्चा हज़ारो साल तक चलाओ
आभासी दुनिया में सच्चाइयां भी होतीं हैं दुनिया को दिखाओ

20 नवंबर 2009 को 11:50 pm
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

जोरदर...लज्जतदार...ओर मजेदार चर्चा !!

सर्किट अभी अडनतश्तरी को उठा के लाया के नहीं ?:)

21 नवंबर 2009 को 12:37 am
राजकुमार ग्वालानी ने कहा…

झकास चर्चा किएला है बिडू,

21 नवंबर 2009 को 9:09 am
राजकुमार ग्वालानी ने कहा…

समीर लाल जी के लिए

हुई महंगी बहुत ही शराब
के थोड़ी-थोड़ी पियो करो
पियो लेकिन रखो हिसाब,
के थोड़ी-थोड़ी पिया करो

21 नवंबर 2009 को 9:10 am
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सर्किट भाई, ऐसी चर्चा करोगे तो हम अपना ब्लाग कब लिखेंगे? बस आपकी चर्चा ही बारबार पढने आते रहेंगे?:) गज कर दियेला भाई.

रामराम.

21 नवंबर 2009 को 9:22 am

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