शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

भाई इदरिच मरेला है ना तुम्हारे पिच्छू...(ब्लाग-चर्चा)

अरे सर्किट..कहां मर गया रे तू?

भाई इदरिच मरेला है ना तुम्हारे पिच्छू...

अरे सर्किट...मेरे पेट मे दरद हो रयेला है...कुछ दवाई ला दे रे..

भाई अपुन के रहते दवाई का क्या काम? ये ब्लाग रस की थोडी सी बूंदे टपका देता हूं ना तुम्हारे गले में..

अरे सर्किट जल्दी कर...पेट मे भौत गडबड हो रयेली है बाप..

अरे भाई...ये लो ये ब्लाग रस का एक ढक्कन पी लो......जल्दी ही दर्द ठीक होजायेगा और नही हो रहा होगा तो होने भी लग जायेगा...


क्या पता-कल हो न हो!!-एक लघु कथा में उडनतश्तरी ने एक आईडिया टपकाया है भाई…

प्रकृति के नियम और स्वभाव तो सब ही के लिए एक से हैं. फिर हम क्यूँ किसी और के व्यवहार के चलते अपने खुशी के समय को भी खराब कर लेते हैं.

जब मिले, जैसे मिले, खुशियाँ मनाओ! क्या पता-कल हो न हो!!



भाई इसके बाद तो गडबडिच दिख रयेली मेरे कू….
अरे बोल ना ..सर्किट..दिमाग का दही मत बना रे..
भाई इदर कूं ये ताऊ ने कुछ गडबड करेली है….


कहीं खबर छपेली है कि ताऊ ने कैटी भाभी से चुपके चुपके शादी करली? दगाबाज कहीं के!….

यार इसमे क्या दिक्कत है? अब हम भी कौन से रोहतकी रह गये भिया? हम भी तुम्हारे शहर के ही हैं अब तो? वो अब भी रहेगी तो तुम्हारे शहर की बहु ही? हां फ़र्क सिर्फ़ इतना पडेगा कि अब तुम उसको भाभी की जगह ताई कह लेना.


अरे सर्किट..ऐसी की तैसी इस ताऊ की तो….कैटी तो तेरी भाभी बनेगी रे…चल ये ताऊ की शादी टपका डाल अबी के अबी..क्या समझा?

समझ गया ना भाई….लो अब एक और ढक्कन पी लो……


लव जिहाद: क्या बला है यह? मे शाश्त्री जी कहते हैं..

जैसा मैँ ने अपने आलेखोँ (केरल में धार्मिक संघर्ष !!,केरल में मुस्लिम-ईसाई संघर्ष??) में कहा था, धार्मिक मामलों में केरल हिन्दुस्तान का सबसे सहिष्णू प्रदेश है. इस सहिष्णुता का फायदा उठा कर ईसाई और हिन्दू लडकियों को मुस्लिम बनाने के एक नये तरीके को सामान्यतया “लव-जिहाद” कहा जाता है. तरीका यह है कि मुस्लिम लडके हिन्दू और ईसाई लडकियों को जान बूझ कर प्रेम-पाश में फंसाते हैं और विवाह के पहले उन लडकियों का धर्म बदल दिया जाता है.


छि.. छि..सर्किट ये गंदी और बुरी बात…
हां भाई…बिल्कुल सहिच बोलते आप…अब ये मिश्राजी की प्रेम मुहब्बत वाला ढक्कन पियो….तबियत झकास हो जायेगी भाई..

यह नायिका है वासकसज्जा !(षोडश नायिका -५) मे कहते हैं.. "सेज को सुन्दर सुगन्धित फूलों से सजा कर सोलह श्रृंगार से संजी सवरी सुन्दरी प्रिय की आतुर प्रतीक्षा में मीठे सपनो में जा खोयी है....प्रियतम बस आते ही होगें यह विश्वास अटल है मन में ....साँसों की लय में भी उसके अंतस का दृढ विश्वास मुखर हो उठा है"




अरे सर्किट..जरुर से ये तो तेरी भाभी ही होयेंगी ना…ये सर्किट चल ना..अब और ऐसे ही ढक्कन पिला…थोडा दर्द कम हो रयेला है…
हां भाई एक कविता का ढक्कन खींचो…


मौन करवट बदलता नहीं पर सीमा जी ने कविता लिखेली है..

रीती हुई मन की गगरिया,
भाव शून्य हो गये,
खामोशी के आवरण मे ,
मौन करवट बदलता नहीं....




और भाई..ये


तेरा मेरा प्यार अमर… गीत सुनिये अल्पनाजी की आवाज में..…ये सुनो..आपतो…

है शबाब पर उमंग, हर खुशी जवान है
मेरी दोनों बाहों में, जैसे आस्मान है
चलती हूँ मैं तारों पर, फिर क्यों मुझको लगता है डर


और भाई ये कृपया राय दीजिए, मुझे क्या करना चाहिए? में आशीष खंडेलवाल जी तो कुछ गडबड झाला करेले हैं...कुछ पिटने पिटाने का धंधा बता रयेले हैं मेरे कूं तो गडबड दिख रयेली है भाई....



इस सेवा का लाभ उठाने के लिए उनके पास ग्राहक भी आने लगे हैं। लिन के अनुसार उनकी पहली ग्राहक 25 साल की लड़की है। उसने आधा घंटे की कीमत अदा की। लेकिन वह जल्द ही थक गई। उसने बाकी समय उनके साथ बातचीत करके निकाला। दूसरी ग्राहक भी ऐसी ही थी। वह भी जल्द ही थक गई। लेकिन लिन को पीटने के बाद दोनों ही बहुत संतुष्ट दिखाई दीं। उनका कहना है कि ऐसा करके वह तनावग्रस्त महिलाओं की मदद कर रहे हैं।



अरे वाह..सर्किट..वाह..ये वाला धंधा तू करले और वो दूसरी वाली नौकरी मुझे दिलवा दे...चल अब ला और ला ये ब्लाग रस का ढक्कन….

वो क्या है ना भाई…डाँ. झटका ने एक बार मे इतना ही डोज लेने का बोला था…अब दूसरा डोज शाम को दूंगा ना भाई..
अरे ऐसी की तैसी इस डाँ. झटका की तो..इत्ती मीठी दवाई और जरासी देता है? फ़ोड डालूंगा इस डाँ.झटके को तो..

हां ठीक है ना भाई..आप क्युं टेंशन लेते हो भाई..मैं है ना, आप सो जावो भाई…मैं फ़ोड डालेगा डाँ. झटका को तो…

और मुन्ना भाई अब सो गये….जब दूसरा डोज दिया जायेगा..तब का हाल बाद में……

19 टिप्पणियाँ:

श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

awesome really..."टिप्पणी" शब्द के टंकण में गलती है, सुधारलो मेरे भाई...यह गलती comment box message में है..

13 नवंबर 2009 को 6:26 pm
Udan Tashtari ने कहा…

मुन्ना सर्किट चिट्ठाचर्चा-ये भी खूब रही. बधाई एवं शुभकामनाएँ.

कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें.

13 नवंबर 2009 को 6:29 pm
नीरज गोस्वामी ने कहा…

बोले तो झकास...
नीरज

13 नवंबर 2009 को 6:32 pm
ललित शर्मा ने कहा…

सर्किट बो्ले तो-झकास चर्चा कियेला हे,

13 नवंबर 2009 को 7:07 pm
रवि सिंह ने कहा…

झक्कास चर्चा है भिड़ू, एकदम रापचिक

13 नवंबर 2009 को 7:26 pm
Mahfooz Ali ने कहा…

सर्किट बो्ले तो-झकास चर्चा कियेला हे.........

13 नवंबर 2009 को 7:45 pm
महेन्द्र मिश्र ने कहा…

झकास चर्चा

13 नवंबर 2009 को 8:21 pm
RAJ SINH ने कहा…

lage raho bidoo .maza aa rayela hai .

13 नवंबर 2009 को 9:50 pm
शोभित जैन ने कहा…

क्या मस्त लिखेला है बाप .... बोले तो पढ़कर दिल Garden Garden हो गया

13 नवंबर 2009 को 9:59 pm
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

इस डाग्टर झटके को तो टपका ही दो....बहुत तंग कर रखा है इस बन्दे :)

13 नवंबर 2009 को 11:20 pm
राजकुमार ग्वालानी ने कहा…

लाजवाब चर्चा है

14 नवंबर 2009 को 12:42 am
'अदा' ने कहा…

बोले तो ....सोलिड है बाप..!!
बहुत अच्छी रही चर्चा....

14 नवंबर 2009 को 6:28 am
sanjaygrover ने कहा…

हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.......
इधर से गुज़रा था] सोचा सलाम करता चलूं

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14 नवंबर 2009 को 2:07 pm
अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य
टिप्पणियां भी करें

14 नवंबर 2009 को 9:13 pm
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

वाकई सेमलानी जी आपने तो कमाल का लिखा है. भई इस स्टाईल की चर्चा अपने को तो बहुत पसंद आई. करते रहिये, जब भी आपको समय मिलता रहे. बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

14 नवंबर 2009 को 11:27 pm
ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सेमलानी जी यहां से वर्ड वैरीफ़िकेशन तो हटाइये?:)

रामराम.

14 नवंबर 2009 को 11:28 pm
महावीर बी. सेमलानी ने कहा…

अबे सर्किट ये ताऊजी किसको रास्ते से ह्टाने का बोल रीईया है ?
भाई! अपनी खोपडी मे ताऊ की बात घुस नही रहेली है-ताऊजी! वर्ड वैरीफ़िकेशन को हटाने का बात कररिया है. भाई! तुम बोलो तो इस वर्ड वैरीफ़िकेशन की तो ऎसी कम तैसी ..........?

15 नवंबर 2009 को 7:25 pm
महावीर बी. सेमलानी ने कहा…

भाई! ये अजय भाई का खत आया है. अपुन का अभिनन्दन करने को मागता है, और आगे लिख रिया है कि ब्लोग पढने का और बहुमूल्य टिप्पणियां करने का..
अरे! सर्किट! तेरे भेजे मे ये बात घूस क्यो नही रही है अपुन के लिए काला अक्षर भैस के माफ़िक है. कहा से बहुमूल्य टिप्पणियां करेगे.
भाई! मेरे खोपडी मे एक आईडीया आऎरेलिया है . आप कहे तो उडन तस्तरी के समीर लालजी को उठा लाता हू टीप्प्णी टपकाने मे उनका जवाब नही. अपुन के लिऎ टिपियाने मे बहु मुल्य भी बहुत तगडा हाथ लेगेग्गा........

15 नवंबर 2009 को 7:50 pm
आशीष खंडेलवाल ने कहा…

अरे वाह सर्किट भाई...मेरा मतलब मुन्ना भाई. आपने तो बडी मस्त चर्चा करेली है.:)

हैप्पी ब्लागिंग।

15 नवंबर 2009 को 8:01 pm

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