सोमवार, 23 नवंबर 2009

रंग रूप और ये काया ,हे! ताऊ ये तेरी माया …सर्किट बोल रयेला

अरे सर्किट…आ गयेला है क्या?  किदर कू गयेला था रे तू?

हां भाई मैं आगयेला है ना….भाई वो उडनतश्तरी के पीछे भाई लोगों ने मच्छर छोड दियेले थे तो मैं वहां गयेला था…

अरे सर्किट मेरे कू लगता है आज तू पियेला है…बाप..कब से शुरु की रे तूने?

अरे भाई आप बी खाली पीली मजाक मारते ..भाई…वो क्या है ना ..वो अपुन के हाथ से की बोर्ड फ़िसल गयेला था…उडनतश्तरी के पिच्छू मछ्छर नही लगायेला था बल्कि उनके कंप्यूटर में मच्छर घुस गयेले थे…मच्छर बोले तो वायरस..मैं वोईच तो निकालने गयेला था भाई…बस अब उडनतश्तरी आतीईच होयेंगी…

 

आप तो ये चर्चा सुनो….

 

कोई भी देश भूगोल में बाद में टूटता है, पर पहले उसे दिमाग में तोड़ा जाता है…..

अरे सर्किट ऐसा बापू ने बोला क्या?

नही भाई…ऐसा गगन शर्माजी बोल रयेले हैं…और राजीव तनेजा जी चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-9 …अब कहां से ढुंढेगा मैं?  और वकील साहब "फिल वक्त" महेन्द्र 'नेह' की एक कविता 'थिरक उठेगी धरती से' मंजे भाई आजीईच लोकारपण है.  और  गोदियालजी को यादें ! सता रयेली हैं भाई…

 

अरे सर्किट..गोदियाल जी को बोलने का..यादें सता रयेली हैं तो कुछ लेने का ना …खाली पीली यादों का सताना बुरी बात है…उनको बोलने का अगर कुछ लेना होयेंगा तो शाम कू भाई के पास आने का…क्या?

हां मैं बोल दियेला भाई…आप टेंशन नही लेने का…..और भाई शाह्स्त्रीजी बता रयेले "खटीमा में स्वाइन-फ्लू तथा बाघ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" फ़ैल गयेला है.

अरे सर्किट ये क्या ब्लाग फ़्ल्यु जैसाईच कुछ होता होयेंगा?

अरे भाई..आप काहे टेंशन लेता है?  ब्लाग फ़्ल्यु की चपेट मे आने के बाद बचने का कोई तरीका काम नही करेला है…अलबत्ता स्वाईन फ़्ल्यु से बच भी सकता है भाई..पर आप टेंशन नही लेने का….

 

अनिल पूसदकर जी बोल रयेले हे भगवान,अगले जनम मे तू मुझे सींधी या सरदार ही बनाना!अबे मुसलमान भी जोड ना,उसको क्यों छोड़ रहा है! 

अरे सर्किट कुछ समझा कर बता ना…

भाई आपईच समझ लिजिये..कुछ बिगडने बिगाडने की बाते हो रयेली हैं….

 


My Photo

समीर लाल जी की एक पोस्ट ने और मेरी कल की पोस्ट पर शरद कोकास ने टिपण्णी ने मुझे ये पोस्ट लिखने पर मज़बूर कर दिया।समीर लाल जी की पोस्ट मे उनके सामने मदिरा का लबरेज़ समन्दर था और मेरे भतीजे को छुपा कर अंडा खिलाने पर थी वो पोस्ट थी जिस पर शरद जी ने कहा था कि अंडे का फ़ंडा तो बच्चे की समझ मे आ गया ,उसे क्या पता बड़े लोग छुप-छुप कर क्या करते हैं।वो बात सीधे-सीधे मेरे लिये ही थी।साफ़-साफ़ कहा जाये तो मेरे शराब पीने पर थी।

और भाई महेंद्र मिश्रा जी चिठ्ठी चर्चा - तब ऐसे में मैं खुश होकर बस प्यार की झप्पी लेता हूँ...   

अरे सर्किट वोईच जादू खी झप्पी की बात कर रयेले हैं क्या? भौत अच्छी बात कर रयेले हैं मिश्रा जी…उनको बोलने का कि रोज झप्पी लेने का और भाई खी भी लेने का..आगे क्या है रे सर्किट?

 

भाई मै निर्झर हूँ  और रक्त तिलक करले  …. ये क्षत्रिय बोल रयेले हैं और शेखावत जी उनके ई एक दोस्त को फ़ंसा लियेला है आखिर फाँस ही लिया हमने रामबाबू सिंह को हिंदी ब्लोगिंग जाल में

अरे सर्किट ये भौत अच्छी बात लग रयेली है…सबको इस तरह फ़ंसना फ़ंसना मंगता अपुन तो…आगे क्या बोल रयेला है?

 

अन्तर सोहिल = Inner Beautiful पर एक पोस्ट है….जिसमे फ़त्तू चौधरी के किस्से हैं…..

सवेरे उठते ही फत्तू बोला - "बाब्बू ठीक सै अगर तू कहवै तो आज से मैं कदे भी दारू नही पीयूंगा।"
रलदू बोलता उससे पहलां ही संतो बोली - "बेटे फत्तू , तू दारू छोड चाहे पी, तेरी मर्जी,  पर तेरा बाब्बू आज के बाद रोज पिवैगा।"

 

और भाई शिवम मिश्रा जी पूछ रयेले हैं सच्चा प्यार चाहिए या नानवेज जोक..... ड़ाल करें ....   और भाई आज तो खुद संगीता जी भी सवाल पूछ रयेली हैं ताऊ पहेली  के माफ़िक ज्‍योतिष का सहारा लेकर क्या भवितब्यता टाली भी जा सकती है - 1 ??…..और शाश्त्री जी रामप्यारी का सवाल जीत गयेले हैं फ़र्रुखाबादी विजेता (120) : डा. रुपचंद्र शाश्त्री "मयंक"

और श्रीश पाठक 'प्रखर' बता रयेले हैं….  सुन्दरतम है...!!!   और शर्मा जी अपने में दफन इंसान की भूल की अनोखी सजा भुगतती एक कब्र  की कथा सुना रयेले हैं.

 

और भाई मुंबई टाईगर बता रयेला है रंग रूप और ये काया ,हे! ताऊ ये तेरी माया   …

अरे सर्किट एक मिनट..एक मिनत रुकने का..पहले मेरे कू बताने का..भाई के मुंबई मे रहते ये दूसरा टाईगर किदर से आयेला है?

अरे भाई आप काहे कू टेंशन लेते…भाई ये तो नाम का टाईगर है..आप असल के टाईगर हैं…बस ये तो ब्लाग का नाम रख लियेला है…तो ये क्या कह रयेला है आप खुदईच देखो….

 

ताऊ पहेली, हिंदी ब्लोगरो के लिए चोपाल बन गई . शनिवार के दिन ज्यादातर ब्लोगर वहां जमा हो जाते है  एवं टिप्पणियों के माध्यम से अपनी खुशी और मौज व्यक्त करते हैं. सभी एक दुसरे को अपने करीब होने जैसा महसूस करने लगे. ब्लोगर  दोस्त बनाने एवं बनने के लिए ताऊ कि इस चोपाल में एकत्रित होने लगे. कई नए ब्लोगर्स ने अपनी पहचान  यही से बनाई . अविवाविदित ताऊ पहेली ने वो तहलका कर दिया जो कई वर्षो तक हिंदी ब्लोग जगत में शायद ही कोई कर सकेगा.

ताऊ कि भी खोपड़ी कोमिक्स के एक पात्र चाचा चोधरी कि तरह चलती है और उन्होंने पाठको को पहेलियों में नायाब नुस्खों से प्रभावित करना शुरू कर दिया . प्रथम  विजेता , द्वितीय विजेता, और साथ ही साथ लगातार तीन बार के विजेताओ को

"महाताऊश्री" कि पदवी से नवाजे जाने कि घोषणा ने   पाठको में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी.

अरे सर्किट मैं बोलता इस ताऊ कॊ ऊठाके इधर लाने का …फ़िर मैं सारी पहेली जीतेंगा….फ़िर अपुन की भी फ़ोटो छपेगी ना सर्किट…देख सबकी कैसे फ़ोटो छपेली है?

हां भाई आप टेंशन नईं लेने का…छपेगी  ना..आपकी फ़ोटो…

 

और रस्तोगी जी सावधा कर रयेले हैं…. अगर आप भारतीय रेल में यात्रा करते हुए चाय पान कर रहे हैं तो सावधान… (IRCTC’s Worst…..)  और भाई रामप्यारी फ़िर खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (121) : रामप्यारी  खेल रयेली है…और भाई जब देखो तनेजा जी चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-23 येईच खेलते रहते हैं…

अरे सर्किट उनको बोल ना अपुन का भी चेहरा नकाब मे छुपाने का..अपुन बी देखेगा कि कईसा लगता है नकाब मे अपुन का चेहरा?

हां भाई टेंशन लेने का नईं…मैं अबी बात करता ना भाई…अबी की अबी…

 

और भाई बबली जी ने GULDASTE - E – SHAYARI शायरी लिखेली है…

अरे सर्किट सुना तो मेरे कूं …ये कैसी होती है….

हां भाई..सुनाता ना मैं अबी आपको..टेंशन नईं लेने का भाई..अब  सुनने का ……

 

ये दिल उदास है, कोई पैगाम ही लिख दो,My Photo
तुम अपना नाम न लिखो, मगर गुमनाम ही लिख दो,
सिर्फ़ विश्वास पर ही साँस टिकी है मेरी,
तुम मेरे नाम सिर्फ़ एक शाम ही लिख दो !

 

 

और भाई मिसिर जी बोल रयेले …एक शाम गिरिजेश ने की मेरे नाम!  …

अरे सर्किट..ये कौन से मिसिर जी हैं रे?.. खाली पीली…शार्ट कट मे काम नईं चलाने का…इज्जत से पूरा नाम बताने का…अपुन भाई है इसका मतलब कोई और कुछ नही समझने का…समझ गया ना?

अरे भाई समझ गयेला ना…वो क्या है उस वक्त  की बोर्ड पर अंगुलियां फ़िसल गयेली थी…तो पुरा नाम नही लिखेली थी..वो अपने अरविंद मिश्रा जी….

अच्छा वही वाले मिश्रा जी..जो प्रेम प्यार और नायक नायिका के भेद बता रयेले थे? अरे सर्किट उनको बोल ना..भाई को वो भौत अच्छी लगेली थी..और लिखने का..

भाई टेंशन नही लेने का..मैं अबी की अबी फ़ोन करके बोलता ना भाई….अबी बोलता है…

 

बवाल भाई की मुहम्मद रॉबर्ट सिंह दुबे .............(बवाल) …और राज भाटिया जी स्वाईन फ़लू ओर इस का होव्वा बता रयेले हैं….और वकील साहब वर्षगांठ भूल गयेले हैं भाई यात्रा में भूली, अनवरत की दूसरी वर्षगाँठ  …और शिवम मिश्रा जी रिकार्ड में बनाए दरोगा ई सिपाही क्या है भाई....?? …पूछ रयेले हैं….और झाजी रविवारी चर्चा , दो लाइन का खर्चा . कर रयेले हैं…और वाणीगीत बोल रयेली हैं  तुम याद आए ...बहुत याद आए….और गौतम राजरिशी सितारे डूबते सूरज से क्या सामान लेते हैं   इसकी खरीदी बेची की टेकनिक बता रयेले हैं भाई….

 

और भाई अदाजी ने तीन शेर सुनायेले हैं…..

अरे सर्किट..तू भी और अदाजी भी मजाक कर रयेली हैं क्या? अरे शेर यानि लायन..वो भी कुछ सुनाने की चीज होती क्या? अरे शेर बडी खतरनाक चीज होती….अपुन कू तो डर लगाता बाप..शेर से..


 

अरे भाई ये शेर वो वाला नहीं होता ना…ये तो कविता का माफ़िक होता है जैसे   पुकारता चला हूँ मैं.......भरी दुनिया में आख़िर दिल को ..

अरे सर्किट ये तो मेरे सनम का मस्त गाना है बाप..मैने बी देखेली थी ये तो ..हां सुनाने का..तबियत से सुना….

 

और भाई नीरज जाट झी धर्मशाला यात्रा करवा रयेले हैं…और ग्वालानी जी बोल रयेले हैं..अबे कितनी बार कहा है झंडा मत बोले कर …और वीर बहुटी पर निर्मला कपिला जी बोल रयेली हैं…

गज़ल *ज़िन्दगी से मैने कहा कि मैं गज़ल सीखना चाहती हूँ तो उसने कहा कि तुम्हारे पास क्या है जो गज़ल लिखोगी? मैने कहा देखो इस मे काफिया भी है रदीफ भी है तो वो हंसी और बोली अरे! मूर्ख ये बहर मे नहीं है।

और अक्साई चिन यानि सफेद नदी का दर्रा...खुशदीप बता रयेले हैं…अब भाई ये आप कल पूछ रयेले थे कि पंकज मिशिर जी किदर कू गये? तो ये आगयेले हैं पंकज मिशिर जी…जो सामने है बीयर और समीर जी …मे बी ईन फ़ीयर (चर्चा हिन्दी चिट्ठो की )  कर रयेले हैं…

 

नमस्कार, पंकज मिसिर आप लोग के बीच आ गया हु …काफ़ी व्यस्तता है लेकिन आज मन नही माना तो मै सोचा कि चलो दो-चार पोस्ट की चर्चा कर ही देता हु..क्या होगा देखा जायेगा …ये लहजा है एक श्री मान जी का ..और देखते ही देखते दो ठू खुल्ला साड पैदा हो गये है ब्लाग जगत मा …….इ खुल्ला साड लोग छुपा खेल शुरु कर दिये है …तो सुन ले कि जितना खेल खेलना है मुस्किल से १० दिन अउर खेल पायेगे ..इसके बाद ? अरे भाया हम आ जायेगे वापस और बान्ध देगे दोनो बन्धुओ को…..

अब चलिये चर्चा कर लेते है नही तो कही हमे भी कोइ बिमार फ़र्मा ना बोल दे :)

और नीरज गोस्वामी जी किताबों की दुनिया – 19 से रुबरु करवा रयेले हैं भाई…

 

ऐ खुदा रेत के सेहरा को समन्दर कर दे

या छलकती हुई आँखों को भी पत्थर कर दे

तुझको देखा नहीं मेहसूस किया है मैंने

आ किसी दिन मेरे एहसास को पैकर* कर दे

पैकर* = आकृति

और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन

मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे

 

 

 

 

 

और भाई राज भाटिया जी अन्ताक्षरी ५ गीतो भरी खिलवा रयेले हैं…..और तस्लीम पर अरविंद मिश्रा जी पहेली पूछ रयेले हैं  आज की पहेली बड़ी कठिन है -बताईये तो यह क्या है ??….

 

और महक जी नज़दीकियाँ मे ये कविता पढवा रयेली हैं….

 

images (9)  जब मैं उदास होती हूँ
मन में ही सिसकती रोती हूँ
बिन कारण ही,ऐसे ही
भावनाओ की नदिया में डूब जाती हूँ
कोई आधार नही होता उन बातों का
जानती हूँ , मगर फिर भी
चली जाती हूँ उन राहों पर
दिल हल्का हो जाता है
उस वक़्त तेरी नज़दीकियाँ
मेरा आधार बनती है

 

और भाई गोदियाल जी बोल रयेले हैं..फिर सनक गया दिमाग कार्टून बनाने को.....

 

और भाई पी.डी. साहब समझ नईं आ रयेला है  क्या शीर्षक दूं, समझ में नहीं आ रहा है…..डाक्टर श्रीमती अजी गुप्ता  बाहर से लौट कर ये कविता  पढवा रयेली हैं  कविता - सिंह-वाली बाहर होगी….. और भारतीय नागरिक बोल रयेले सात मौतें ज्यादा बड़ी हैं या एक व्यक्ति की दूसरी शादी…   से. सही बात है भाई…

और भाई रंजना [रंजू भाटिया] जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं..

जाने लोग यहाँ क्या-क्या तलाश करते हैं  
पतझड़ों में हम सावन की राह तक़ते हैं
अनसुनी चीखों का शोर हैं यहाँ हर तरफ़
गूंगे स्वरों से नगमे सुनने की बात करते हैं

 

भाई आप अब आराम करने का..मैं जरा लक्की सिंह का मकान खाली करवाने जा रयेला है और वो खुशदीप भाई ने आपके लिये एक मैच ढूंढेला है….

.वैसे बाप इधर मुन्ना भाई का एक सालिड मैच ढूढेला ए...मुन्नी मेंटेन....क्या बमचिक आइटम है बाप...इलाके में मुन्नी मेंटेन का क्राइम ग्राफ सबसे टॉप पर है बॉस...मुन्नी मेंटन बस मुन्ना भाई के फोटा का डिमांड किएला है...कोई रपचिक फोटू भेज रे सर्किट..

तो भाई  मैं  खुशदीप भाई के पास जा रयेला है..पहले मुन्नी मेंतैन भाभी को देखेगा…मेरे कूं आपके लायक मैछ लगेगा तो आपका फ़ोटो मैं होने वाली मुन्नी भाभी को देंगा..

हां ठीक है रे सर्किट तू कल जा और अबी के अबी लौट के आने का? समझ गयेला क्या?

हां भाई आप काहे कू टेंशन लेता? मैं सब समझ गयेला है ना…

13 टिप्पणियाँ:

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बड़े विस्तार से चर्चा कर डाली है आपने । मजेदार ।

23 नवंबर 2009 को 4:23 pm
संगीता पुरी ने कहा…

सारे ब्‍लोगों की चर्चा हो गयी लग रही है !!

23 नवंबर 2009 को 5:32 pm
'अदा' ने कहा…

ऐ सर्केश्वर,
अपुन को तेरे से सॉरी बोलने का है...वो क्या है न अपुन आज कल वो वो वो 'व्यस्तता' है न उसके साथ थोडा टाइम पास कर रहेली है...किसी को बोलने का नई.....क्या...!! नई तो बिन बात लोचा होएंगा ......
कल तेरे को टिपण्णी का परसाद नई दिया ....इस वास्ते मगज में टेंशन हो रहेली है....पण तेरे को टेंशन नई लेने का.....तेरा खोका तेरे को बरोबर मिलेंगा ....क्या...
और चर्चा तो बिडू.....एकदम रापचिक.....झकास.....बिंदास......फूलटास.... क्या !!!

23 नवंबर 2009 को 6:40 pm
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…

ताक धिना धिन धिन
चिक धिन धिन
चर्चा करते मुन्ना गिन गिन
सर्किट अपना टेक लगाए
आधी को पूरी कर जाए
अचर्चित अब चर्चित नित नित
शैली सबको भाती हर दिन
ताक.......धिना धिन.........

23 नवंबर 2009 को 7:51 pm
रंजन ने कहा…

बहुत सारे ब्लोग की चर्चा हो गयेली है.. मस्त.. लगे रहो..

23 नवंबर 2009 को 7:51 pm
Udan Tashtari ने कहा…

क्या सर्किट...बिना मच्छर भगाये भाग गया चर्चा करने और यहाँ अभी तक एक एक पकड़ कर निकाल रहे हैं...मच्छर हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे.

मस्त चर्चा की है भाई...पूरी तसल्ली से-इत्मिनान से. नियमित करते रहिये..अति आनन्ददायी!!

23 नवंबर 2009 को 8:39 pm
Nirmla Kapila ने कहा…

रे सर्किट आज तो अपुन का नाम भी चमक रहा है बहुत अच्छी चर्चा है । बधाईयां

23 नवंबर 2009 को 8:52 pm
खुशदीप सहगल ने कहा…

क्या चर्चा का आइटम पे आइटम दिए जाइला रे बाप...फुलटू मस्त...मुन्नी मेंटेन एक को टपकाने के चक्कर में तिहाड़ में है रे बिंदास...मुन्ना भाई से कहने का...किसी कू टपकाने का...तिहाड़ जाने का...वही वन टू वन मुलाकात करने का...

जय हिंद...

24 नवंबर 2009 को 8:31 am
पी.सी.गोदियाल ने कहा…

Bahut Khoob !

24 नवंबर 2009 को 9:59 am
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

एकदम मस्त चर्चा....बहुत से ब्लाग एक साथ निपटा डाले :)

24 नवंबर 2009 को 5:59 pm
Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा…

मुन्ना भाई,
आज सर्किट आया था। बोला क्या भाई रोज आपकू याद करता, पर आप उधर आताईच नही। चुपचाप आने का, बात करने का और जाने का। कोई लफड़ा नेइ।
तो भाई अपनी भी हाजीरी लगाने को मांगता, अरे माफ किजिये, अपनी भी हाजिरी लगा दिजिए कहीं सर्किट के दिमाग का शार्ट-सर्किट ना हो जाए।

सलाम भाई।

24 नवंबर 2009 को 8:17 pm
श्रीश पाठक 'प्रखर' ने कहा…

बोले तो चकाचक..मस्त..!

25 नवंबर 2009 को 8:04 am
jai ने कहा…

ganpati bapa moriya bharat me kya ho riya gadhe rang rahe ha kursi pa moter boga do riya..................

24 सितंबर 2011 को 3:05 pm

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